भोपाल में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजनीति के मूल मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि इस क्षेत्र में सफल वही हो सकता है, जो विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन के साथ जनसेवा की भावना रखता हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से राजनीति में आने वाले लोग लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करते हैं।
जनप्रतिनिधि के लिए संवेदनशीलता और अध्ययन जरूरी
सीएम ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि को जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील, अध्ययनशील और तनाव प्रबंधन में दक्ष होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी चुनौती के समय जनप्रतिनिधि का व्यवहार और समाधान क्षमता ही उसके व्यक्तित्व की पहचान होती है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्यों और समाजहित के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करना जरूरी है।
भारतीय परंपरा में निहित है लोकतंत्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र केवल पश्चिमी अवधारणा नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा का स्वाभाविक हिस्सा है। उन्होंने बताया कि भारत में प्राचीन काल से ही विचारों के आदान-प्रदान और शास्त्रार्थ की परंपरा रही है, जिसने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया। युवा विधायकों को प्रेरित करते हुए उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन से सीख लेने की बात कही, जिन्होंने हर परिस्थिति को समान भाव से स्वीकार किया।
युवा विधायकों की अहम भूमिका
मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि युवा विधायक नागरिकों और शासन के बीच एक मजबूत सेतु का काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर युवा नेतृत्व सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर जोर
सम्मेलन में बताया गया कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में युवा जनप्रतिनिधियों की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें संसदीय परंपराओं का अध्ययन कर सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि विधायक जनता और शासन के बीच संवाद का माध्यम होते हैं। उन्होंने पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी को लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया।
जनप्रतिनिधियों के लिए अहम संदेश
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विधायक जनता की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उन्हें संयमित व्यवहार और तकनीकी दक्षता के साथ काम करना चाहिए। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता से भावनात्मक जुड़ाव बनाना चाहिए और विकास के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठना जरूरी है।
तीन राज्यों के युवा विधायक हुए शामिल
इस सम्मेलन में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 45 वर्ष तक के युवा विधायक शामिल हुए, जहां उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और लोकतंत्र को मजबूत बनाने पर चर्चा की।