छत्तीसगढ़ में सरकार बॉक्साइट और लेटराइड भंडारों की डिजिटल मैपिंग करने जा रही है। इसके लिए छत्तीसगढ़ विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (सी-कास्ट) और केंद्रीय खनिज मंत्रालय के जवाहरलाल नेहरु एल्यूमीनियम अनुसंधान, विकास और अभिकल्प केंद्र नागपुर के बीच समझौता हुआ है। इसके साथ ही बॉक्साइट भंडार की भू-तकनीकी मूल्यांकन परियोजना शुरु होगी।
छत्तीसगढ़ में स्थित बॉक्साइट और लेटराइड भंडार का जिलेवार डिजिटल डेटा बेस बनाएंगे
इस समझौते के अनुसार, दोनों संस्थान अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की मदद से छत्तीसगढ़ में स्थित बॉक्साइट और लेटराइड भंडार का जिलेवार डिजिटल डेटा बेस बनाएंगे। इसके लिए भू-तकनीकी मूल्यांकन और भू-संदर्भित मानचित्रों का उपयोग किया जाएगा। इस समझौते पर छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और रीजनल विज्ञान केंद्र के महानिदेशक डॉ. एस, कर्मकार और एल्यूमीनियम अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. अनुपम अग्निहोत्री ने सिगनेचर किए। इस मौके पर परियोजना से जुड़े कई वैज्ञानिक और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे थे। प्रदेश में बॉक्साइट और लेटराइट से जुड़े खनन और स्टील उद्योगों के लिए ये समझौता बहुत जरुरी बताया जा रहा है।
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एल्यूमिनियम का उपयोग करने वाले उद्योगों के लिए ये परियोजना बहुत उपयोगी होगी
अधिकारियों ने बताया कि अच्छे ग्रेड के कच्चे बॉक्साइट अयस्क की कमी का सामना कर रहे एल्यूमीनियम उद्योग और कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में एल्यूमिनियम का उपयोग करने वाले उद्योगों के लिए ये परियोजना बहुत उपयोगी होगी। इसका लाभ बॉक्साइट और लेटेराइट अयस्क का कार्य कर रहे उद्यमियों के अलावा छत्तीसगढ़ और मध्य भारत में स्थित मौजूद खान मालिकों और बॉक्साइट उद्योगों को भी मिलेगा। राज्य के नए उद्यमी रिमोट सेंसिंग और जीआईएस से प्राप्त डेटाबेस का उपयोग किसी भी विद्यमान खनिक, एल्यूमीनियम उद्योग में किया जा सकता है।
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