होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है और रंग-गुलाल के बिना यह त्योहार अधूरा है। रंग-गुलाल में रासायनिक पदार्थ मिले होने के कारण लोग सुरक्षा कारणों से होली खेलने से बचते हैं। जबलपुर में होली के विशेष तौर पर हर्बल गुलाल तैयार किया जाता है, जिसे मक्के के आटे से बनाया जाता है। इसमें किसी प्रकार के रसायन का उपयोग नहीं किया जाता है। गुलाल का निर्माण मक्के के आटे और फूलों की पंखुड़ियों से किया जाता है। प्राकृतिक पदार्थों से बने होने के कारण यह गुलाल त्वचा के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है।
फूलों के कारण गुलाल से सुगंधित हो जाता है। उनके द्वारा बनाए जा रहे गुलाल की डिमांड में प्रतिवर्ष बढ़ोतरी हो रही है, जिसका मुख्य कारण लोगों में प्राकृतिक वस्तुओं के प्रति जागरुकता बढ़ाना है। इसके अलावा केमिकल त्वचा के लिए हानिकारक है और त्वचा रोग का कारण है। यह गुलाल पूरी तरह से प्राकृतिक है और त्वचा के लिए भी सुरक्षित है। इसे बनाने में किसी तरह के केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाता है और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है। मक्के का आटा व फूल त्वचा के लिए अच्छे होते हैं और इससे त्वचा में निखार आता है।
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