मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आने वाला है। अब कर्मचारी चयन मंडल (ESB) सीधे भर्ती परीक्षा आयोजित करने के बजाय केवल 'पात्रता परीक्षा' (Eligibility Test) लेगा। इस नई व्यवस्था का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुतीकरण के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इस पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।
नया प्रस्ताव और नई प्रक्रिया क्या है?
प्रस्ताव के अनुसार, कर्मचारी चयन मंडल समान प्रकार के पदों के लिए साल में केवल एक बार संयुक्त पात्रता परीक्षा आयोजित करेगा। परीक्षा के बाद मंडल अभ्यर्थियों का स्कोरकार्ड अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी करेगा। इसके बाद प्रदेश के विभिन्न विभाग अपनी आवश्यकता के अनुसार रिक्त पदों का विज्ञापन पोर्टल पर प्रकाशित करेंगे। विभाग, ESB द्वारा जारी स्कोरकार्ड के अंकों और लागू आरक्षण नीति के आधार पर अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट तैयार करेंगे और उसी के आधार पर सीधे चयन और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करेंगे।
ढाई महीने में मिलेगी नौकरी
ESB के अधिकारियों का दावा है कि इस नई प्रणाली के लागू होने से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और समय की बचत होगी। वर्तमान में भर्ती पूरी होने में लगभग 1 से 1.5 साल का समय लगता है, लेकिन नई व्यवस्था में यह प्रक्रिया केवल 2 से ढाई महीने में पूरी हो सकेगी। इससे अभ्यर्थियों को अलग-अलग पदों के लिए बार-बार परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी।
वर्तमान व्यवस्था बनाम नई व्यवस्था
अभी तक की व्यवस्था में विभाग पहले पदों का विवरण ESB को भेजते थे, इसके बाद ESB विज्ञापन जारी करता था, परीक्षा लेता था और परिणाम घोषित करता था। अंत में विभाग दस्तावेज़ सत्यापन कर नियुक्ति देते थे।
नई व्यवस्था में ESB का काम केवल पात्रता परीक्षा आयोजित करना और स्कोरकार्ड जारी करना तक सीमित रहेगा। शेष प्रक्रिया विभाग स्वयं करेंगे। नियम संशोधन का प्रारूप तैयार हो चुका है और इस माह के अंत तक कैबिनेट की बैठक में इसे अंतिम मंजूरी मिलने की संभावना है। इससे विभाग अपनी जरूरत के अनुसार रिक्त पदों को तेजी से भर सकेंगे।
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