कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए अपने विवादित बयान के मामले में मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने एक बार फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई से ठीक दो दिन पहले, मंत्री विजय शाह ने इंदौर में मीडिया के सामने चौथी बार क्षमा याचना की।मंत्री विजय शाह ने कहा कि उनका किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या किसी समाज और वर्ग का अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा बोले गए शब्द उनकी मूल भावना के अनुरूप नहीं थे और देशभक्ति के उत्साह, उत्तेजना और आवेश में निकल गए थे।
गलती स्वीकार करता हूं, आत्ममंथन किया - विजय शाह
मंत्री विजय शाह ने कहा, मैं पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुका हूं कि मेरी कोई दुर्भावना नहीं थी। जो शब्द बोले गए, वे निस्संदेह गलत थे। मेरी छोटी सी गलती से इतना बड़ा विवाद पैदा होना मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक है। मैंने इस घटना से आत्ममंथन किया है, सबक लिया है और अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं।
उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है और भविष्य में वे अपनी वाणी पर पूरी तरह नियंत्रण रखेंगे। मंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय सेना के प्रति उनके मन में हमेशा सम्मान रहा है और रहेगा। अंत में उन्होंने नागरिकों, भारतीय सेना और समाज से पुनः अंत:करण से माफी मांगी।
महू में दिए बयान से शुरू हुआ विवाद
गौरतलब है कि 11 मई को इंदौर के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विवादित बयान दिया था। इस दौरान उन्होंने आतंकियों और पाकिस्तान के संदर्भ में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद बढ़ गया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार को देना है जवाब
मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) की मंजूरी को लेकर मध्यप्रदेश सरकार को 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। सरकारी और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग कर सकती है। सरकार की ओर से यह तर्क पेश किया जा सकता है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत परीक्षण आवश्यक है। इसी तरह की प्रतिक्रिया इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की भी बताई जा रही है।अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और राज्य सरकार के रुख पर टिकी हुई हैं।
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