उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर न केवल ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी माना जाता है, बल्कि अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण भी विशेष स्थान रखता है। महाशिवरात्रि से पूर्व मनाया जाने वाला दस दिवसीय शिवनवरात्रि महोत्सव देश में केवल इसी मंदिर में प्रचलित है। यह अनुष्ठान भगवान शिव के नवरात्रि रूप का उत्सव माना जाता है, जिसमें प्रत्येक दिन विशेष पूजा, अभिषेक और श्रृंगार की विधान सम्मत परंपराएँ निभाई जाती हैं। इस उत्सव की शुरुआत होते ही मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संचार महसूस होने लगता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
कोटेश्वर महादेव के पूजन से हुआ शुभारंभ
महोत्सव का शुभारंभ परंपरागत रूप से कोटेश्वर महादेव के पूजन-अर्चन से किया गया। विधि-विधान संपन्न करने के लिए गर्भगृह में पुजारी घनश्याम शर्मा के नेतृत्व में ग्यारह ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचामृत पूजन और एकादश-एकादशनी रुद्राभिषेक संपन्न हुआ। वातावरण में गूंजते मंत्र, प्रज्वलित दीप और गंगा जल, दूध, दही, शहद, घी तथा शक्कर से किए गए अभिषेक ने अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की। यह वैदिक प्रक्रिया महोत्सव की पवित्रता और महाकाल की अनंत शक्तियों के आवाहन का प्रतीक है।
प्रथमार्च के दिन महाकाल का अद्वितीय श्रृंगार
पहले दिन सुबह भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पारंपरिक विधियों के अनुसार चंदन उबटन से स्नान के बाद जलधारी पर हल्दी अर्पित की गई, जिससे भगवान का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी प्रतीत हुआ। श्रद्धालु इस पवित्र स्नान-दर्शन को सौभाग्य का प्रतीक मानते हैं। इसके बाद दोपहर के भोग-आरती के पश्चात पुनः पंचामृत पूजन संपन्न हुआ, जिसमें भक्तों की उपस्थिति से पूरा परिसर शिवमय हो उठा।
अपराह्न में भांग से हुआ विशेष श्रृंगार
शिवनवरात्रि के प्रथम दिवस की सबसे विशिष्ट परंपरा भगवान महाकाल का भांग से श्रृंगार है। मान्यता है कि भांग भगवान शिव का प्रिय प्रसाद है और इससे किए गए श्रृंगार का दर्शन पापनाशिनी और सौभाग्यप्रद माना जाता है। पुजारियों द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार किया गया भांग लेप भगवान के स्वरूप पर लगाया गया, जिससे उनका अलौकिक, महाआकर्षक और रजत-छटा से दमकता दिव्य रूप प्रकट हुआ। इस दृश्य ने भक्तों को अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
रंग-बिरंगे नवीन वस्त्रों ने बढ़ाई दिव्यता
इस अवसर पर भगवान महाकाल को लाल, गुलाबी और पीले रंग के नवीन वस्त्र अर्पित किए गए। इन रंगों का चयन शिवनवरात्रि के सात्त्विक और आध्यात्मिक भाव का प्रतीक माना जाता है। सुगंधित फूलों, दिव्य आभूषणों और मधुर धूप-दीप की सुगंध ने श्रृंगार को और अधिक अलौकिक बना दिया। गर्भगृह से प्रसारित दिव्य आभा और भक्तों की उमड़ती आस्था ने पूरे महाकाल परिसर को त्यौहार की पवित्र ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया।
मंदिर परिसर में बढ़ती रौनक और श्रद्धा का सागर
शिवनवरात्रि महोत्सव के आरंभ के साथ ही उज्जैन शहर में भक्ति का वातावरण चरम पर पहुंच गया है। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं। महाकालेश्वर के जयकारों, घंटियों की ध्वनि और रुद्राभिषेक के मंत्रों से गूंजता यह वातावरण भक्तों को गहराई से जोड़ता है। दस दिनों तक चलने वाला यह उत्सव दैनिक श्रृंगारों, विशेष पूजाओं और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से महाशिवरात्रि की महिमा को और अधिक भव्यता प्रदान करता रहेगा।
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