मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि शहर के अधिकांश नालों का पानी अत्यंत दूषित है। इस पानी में भारी मात्रा में सीवेज मिला हुआ है, जिसका उपयोग सब्जी की खेती और निस्तार के लिए किया जा रहा है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि ऐसे पानी से उगाई गई सब्जियां सीधे तौर पर मानव जीवन के लिए खतरनाक हैं और गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकती हैं।
नालों के पानी की जांच में चौंकाने वाले तथ्य
हाईकोर्ट के निर्देश पर कृषि अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की संयुक्त टीम ने 23 नवंबर 2025 को जबलपुर के ओमती नाला, मोती नाला, खूनी नाला, उदरना नाला सहित अन्य नालों से पानी के सैंपल एकत्र किए थे। जांच में पाया गया कि इन सभी नालों के पानी में बीओडी (BOD) और टोटल कोलीफार्म तथा फेकल कोलीफॉर्म की मात्रा तय मानकों से कहीं अधिक है। जांच रिपोर्ट के अनुसार यह पानी अनुपचारित सीवर का जल है।
खेती, पीने और नहाने के लिए अनुपयुक्त पानी
प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह दूषित पानी न तो पीने के लिए सुरक्षित है, न ही नहाने और न ही खेती जैसे किसी भी उपयोग के लिए। इसके बावजूद इसी पानी से सब्जियों की सिंचाई की जा रही है, जिससे ये सब्जियां सीधे आम लोगों की थाली तक पहुंच रही हैं और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं।
विधि छात्र की पहल से सामने आया मामला
यह मामला तब सामने आया जब एक विधि छात्र ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर जानकारी दी कि जबलपुर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में नालों के दूषित पानी से सब्जियों की खेती की जा रही है। पत्र में बताया गया कि ऐसी सब्जियों का सेवन लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक हो सकता है। इस पत्र को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के आदेश दिए।
हाईकोर्ट का सख्त रुख और सरकार को निर्देश
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए। कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सुझावों पर तत्काल अमल करने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ किया कि जनस्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अगली सुनवाई की तारीख तय
हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 2 फरवरी की तारीख तय की है। तब तक सरकार को प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
Comments (0)