कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में चलने वाली मिड-डे मील योजना पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि केंद्र सरकार को पिछले तीन वर्षों के खर्च का विवरण यानी 'यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट' (UC) समय पर नहीं मिल पा रहा है। केंद्र ने साफ कर दिया है कि जब तक पिछला हिसाब नहीं मिलेगा, नया फंड जारी नहीं किया जाएगा।
पोर्टल बना सबसे बड़ी बाधा
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जिस केंद्रीय पोर्टल (MIS) के माध्यम से खर्च का विवरण जमा किया जाता है, वह पिछले कई दिनों से काम नहीं कर रहा है। विभाग का कहना है कि उन्होंने केंद्र को कई बार इस तकनीकी खराबी के बारे में सूचित किया, लेकिन सोमवार सुबह तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
3 साल का हिसाब देना है अनिवार्य
नियमों के मुताबिक, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में पिछले पूरे खर्च का ब्योरा देना होता है। साल 2023 में केंद्र द्वारा आवंटित राशि से मार्च 2026 तक का काम चलाया गया है। अब 2026 के नए बजट के लिए पिछले तीन वर्षों का डेटा अपलोड करना अनिवार्य है। पोर्टल खराब होने के कारण डेटा मैन्युअली (पुराने तरीके से) तैयार किया जा रहा है, जिसमें काफी समय लग रहा है।
मई से खत्म हो सकता है राशन का पैसा
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
विभाग के पास फिलहाल इतना पैसा है कि अप्रैल महीने का मिड-डे मील चलाया जा सके।
यदि अप्रैल के अंत तक केंद्र से नई किश्त नहीं मिली, तो मई महीने से राज्य के स्कूलों में मिड-डे मील बंद होने की नौबत आ सकती है।
10 अप्रैल की डेडलाइन पहले ही निकल चुकी है, जिससे फंड मिलने की संभावना कम होती जा रही है।
राज्य की अपनी प्रणाली है सक्रिय
अधिकारी ने बताया कि राज्य का अपना पोर्टल ‘ऑटोमेटेड मैसेज सिस्टम’ (AMS) ठीक से काम कर रहा है, जहाँ जिला अधिकारी दैनिक डेटा अपलोड करते हैं। समस्या केवल केंद्र के पोर्टल पर डेटा सिंक करने में आ रही है। फिलहाल विभाग ईमेल के जरिए रिपोर्ट भेजने और केंद्र के साथ बातचीत करने की कोशिश कर रहा है ताकि बच्चों के भोजन पर कोई असर न पड़े।