नई दिल्ली- रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक अब सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, बल्कि दिल की सेहत के लिए भी खतरा बनता नजर आ रहा है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में हार्ट अटैक झेल चुके मरीजों के खून में बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक कण पाए गए हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि इस अध्ययन से यह साबित नहीं होता कि प्लास्टिक सीधे हार्ट अटैक का कारण है, लेकिन दोनों के बीच संभावित संबंध की ओर जरूर संकेत मिलता है।
क्या कहता है नया अध्ययन?
यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में 61 मरीजों के रक्त के नमूनों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक हो चुका था, उनके खून में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी सामान्य लोगों की तुलना में अधिक थी।
अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष:
84% हार्ट अटैक झेल चुके मरीजों के खून में माइक्रोप्लास्टिक या नैनोप्लास्टिक मिले।
40% क्रॉनिक इस्केमिक हार्ट डिजीज वाले मरीजों में ये कण पाए गए।
सामान्य कोरोनरी आर्टरी वाले 32% लोगों के रक्त में भी माइक्रोप्लास्टिक मिले।
क्या होते हैं माइक्रोप्लास्टिक?
माइक्रोप्लास्टिक बेहद छोटे प्लास्टिक कण होते हैं, जो आंखों से दिखाई नहीं देते। ये प्लास्टिक की बोतलों, पैकेजिंग, सिंथेटिक कपड़ों और अन्य प्लास्टिक उत्पादों के टूटने से बनते हैं। इनसे भी छोटे नैनोप्लास्टिक शरीर के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं। पहले के कई अध्ययनों में इन्हें डीएनए को नुकसान, सूजन और कैंसर जैसी समस्याओं से भी जोड़ा गया है।
धूम्रपान और प्रदूषण से बढ़ सकता है खतरा
अध्ययन में यह भी सामने आया कि:
धूम्रपान करने वालों के खून में माइक्रोप्लास्टिक मिलने की संभावना करीब छह गुना अधिक थी।
लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने वाले लोगों में भी माइक्रोप्लास्टिक का स्तर ज्यादा पाया गया।
जो लोग धूम्रपान भी करते थे और प्रदूषण के संपर्क में भी अधिक रहते थे, उनमें लगभग सभी के खून में प्लास्टिक कण मिले।
वहीं, जो लोग न धूम्रपान करते थे और न ही अधिक प्रदूषण वाले माहौल में रहते थे, उनमें केवल 12.5% मामलों में माइक्रोप्लास्टिक पाए गए।
वैज्ञानिकों ने क्या कहा?
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन माइक्रोप्लास्टिक और हृदय रोगों के बीच संभावित संबंध की ओर इशारा करता है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि माइक्रोप्लास्टिक सीधे हार्ट अटैक का कारण हैं। इस संबंध को समझने के लिए बड़े स्तर पर और शोध की आवश्यकता है।