राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में TT वैक्सीन की जगह अब Td वैक्सीन को शामिल किया जा रहा है। पहले जहां TT केवल टेटनस से सुरक्षा देता था, वहीं Td वैक्सीन दो गंभीर बीमारियों—टेटनस और डिप्थीरिया—दोनों से बचाव प्रदान करती है। यह बदलाव यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम का हिस्सा है और इसका उद्देश्य व्यापक स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि द्विपक्षीय सुरक्षा देना समय की मांग है क्योंकि डिप्थीरिया के मामले पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
किन लोगों को दी जाती है Td वैक्सीन
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों में बताया गया है कि Td वैक्सीन मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं, 10 तथा 16 वर्ष के किशोरों और आवश्यकता पड़ने पर बूस्टर डोज लेने वाले वयस्कों को दी जाती है। किसी प्रकार की चोट, जख्म या संक्रमण की आशंका होने पर भी डॉक्टर Td वैक्सीन लगाने की सलाह दे सकते हैं। वैक्सीनेशन का शेड्यूल पहले जैसा ही रखा गया है, जिससे लोगों को किसी प्रकार की नई जटिलता का सामना न करना पड़े।
सरकार ने Td वैक्सीन की जरूरत क्यों महसूस की
भारत में अभी भी डिप्थीरिया के sporadic मामले सामने आते हैं और कई वयस्कों में इस बीमारी के प्रति पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हो पाती। ऐसे में केवल टेटनस वाली वैक्सीन पर्याप्त नहीं मानी जा रही थी। Td वैक्सीन को शामिल करना मातृ और सामुदायिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास है। इसे ड्यूल प्रोटेक्शन रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जो एक ही इंजेक्शन में दो बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।
टीकाकरण शेड्यूल पहले जैसा ही रहेगा
सरकारी बदलावों के बावजूद लोगों के लिए राहत की बात यह है कि टीकाकरण का समय और अंतराल वही रखा गया है। गर्भवती महिलाओं, किशोरों और बूस्टर डोज लेने वालों को उसी क्रम में टीकाकरण करवाना होगा जैसा पहले TT वैक्सीन के लिए निर्धारित था। यह निरंतरता सुनिश्चित करती है कि स्वास्थ्य प्रणाली और आम नागरिकों को किसी नए शेड्यूल से सामंजस्य बनाने की आवश्यकता न पड़े।
लोगों के लिए क्या है महत्वपूर्ण संदेश
यह बदलाव पूरी तरह से नई नीति नहीं है, बल्कि पहले से लागू व्यवस्था को व्यापक रूप से मजबूत करने की प्रक्रिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि Td वैक्सीन अपनाने से मातृ स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य और सामुदायिक प्रतिरक्षा तीनों को लाभ मिलेगा। आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि वे अपने निर्धारित टीकाकरण शेड्यूल का पालन करें और किसी भी भ्रम या प्रश्न की स्थिति में नजदीकी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से सलाह अवश्य लें। स्वास्थ्य सुरक्षा और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने का यह सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
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