नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पूरी तरह आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25,530 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘सार्थक PDS योजना’ को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य राशन वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाना है, ताकि देश के करोड़ों गरीब और जरूरतमंद नागरिकों तक खाद्यान्न बिना किसी बाधा के पहुंच सके। सरकार के इस फैसले का सीधा असर देश के करीब 80 करोड़ लाभार्थियों पर पड़ेगा, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के तहत हर महीने राशन प्राप्त करते हैं। योजना मार्च 2031 तक लागू रहेगी और अगले पांच वर्षों में राशन व्यवस्था के बुनियादी ढांचे, डिजिटल सिस्टम और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा।
कैबिनेट बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह फैसला देश के खाद्य सुरक्षा नेटवर्क को नई मजबूती देगा। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम चला रहा है, जिसके जरिए हर महीने करोड़ों लोगों को राशन उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि ‘सार्थक PDS योजना’ के तहत राशन दुकानों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि लाभार्थियों को अधिक सुगमता और पारदर्शिता के साथ खाद्यान्न मिल सके। सरकार का मानना है कि इससे वितरण प्रणाली में होने वाली गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार पर भी काफी हद तक रोक लगेगी।
राशन दुकानों का होगा आधुनिकीकरण
नई योजना के तहत देशभर की राशन दुकानों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। डिजिटल मशीनें, बेहतर स्टोरेज सिस्टम, ऑनलाइन ट्रैकिंग और स्मार्ट वितरण प्रणाली जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे लाभार्थियों को लंबी लाइन, तकनीकी गड़बड़ी और राशन वितरण में देरी जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर रहेगा कि हर लाभार्थी को तय समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ उसका राशन मिल सके। इसके अलावा राशन दुकानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए विशेष ट्रेनिंग और निगरानी व्यवस्था भी तैयार की जाएगी।
80 करोड़ लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार के अनुसार इस योजना का सबसे बड़ा लाभ देश के गरीब, निम्न आय वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिलेगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत मिलने वाला राशन करोड़ों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों का अहम हिस्सा है सरकार का कहना है कि पीडीएस सिस्टम में सुधार होने से राशन वितरण की गुणवत्ता और पहुंच दोनों बेहतर होंगी। दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी अब अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित सेवाएं मिल सकेंगी।
पारदर्शिता और निगरानी पर रहेगा जोर
‘सार्थक PDS योजना’ का एक प्रमुख उद्देश्य राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना है। इसके तहत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और डेटा ट्रैकिंग को मजबूत किया जाएगा ताकि फर्जीवाड़ा, कालाबाजारी और डुप्लीकेट लाभार्थियों जैसी समस्याओं पर रोक लगाई जा सके। सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित व्यवस्था से लाभार्थियों को सही मात्रा में और सही समय पर राशन उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही शिकायत निवारण तंत्र को भी और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
वैश्विक स्तर पर मिसाल बना भारत का खाद्य सुरक्षा मॉडल
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत का खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम दुनिया में समावेशी विकास के बड़े उदाहरणों में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आबादी तक हर महीने खाद्यान्न पहुंचाना अपने आप में एक विशाल प्रशासनिक और लॉजिस्टिक व्यवस्था है। सरकार का दावा है कि ‘सार्थक PDS योजना’ के लागू होने के बाद भारत का सार्वजनिक वितरण प्रणाली मॉडल और अधिक मजबूत एवं आधुनिक बनकर उभरेगा।