नई दिल्ली - भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह वैध और संविधान सम्मत है। कोर्ट ने माना कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराना भारत निर्वाचन आयोग का अधिकार और जिम्मेदारी है। न्यायालय द्वारा SIR को सही ठहराए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि एनडीए नेताओं ने फैसले को चुनाव आयोग की जीत बताया है। इसी क्रम में बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
देश में अराजकता भड़काने की कोशिश नाकाम हुई
मीडिया से बातचीत में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि, आज सर्वोच्च न्यायालय ने SIR की प्रक्रिया को पूर्णतः संविधान सम्मत सिद्ध कर दिया है। ये कांग्रेस की पूर्ण पराजय है जो नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक तीनों आयामों पर कांग्रेस और विपक्ष ध्वस्त हो गया है। इसके साथ ही बीजेपी नेता ने आगे कहा कि, बिहार और बंगाल में निर्णायक और करारी हार के बाद, और देश में अराजकता भड़काने की उनकी नापाक साज़िश को कोई समर्थन न मिलने के बाद यह एकनैतिक हार थी।
राजनीतिक, संवैधानिक और नैतिक हार है
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि, अब, सुप्रीम कोर्ट में SIR को लेकर उनकी याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है।अब इसे संवैधानिक हार कहा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद, विपक्ष खास तौर पर कांग्रेस पार्टी, और विशेष रूप से राहुल गांधी की पूरी हार को 'PCM' के रूप में संक्षेप में बताया गया है यानी, राजनीतिक, संवैधानिक और नैतिक हार है।
SIR प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान सम्मत माना
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने अपने इस बयान में आगे कहा कि, SIR प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान सम्मत माना है और चुनाव आयोग के अधिकार के अंतर्गत माना है। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के लिए आवश्यक माना है। INDIA गठबंधन, जो सनातन धर्म विध्वंसक और घुसपैठिया संरक्षक है, उसका वास्तविक चरित्र आज सामने आ गया है।
SIR संवैधानिक भी है वो लीगल भी है
भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में शुरू हुए वोटर रोल की SIR करने के ECI के फैसले को सही ठहराने पर कहा, "सत्यमेव जयते...आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो SIR की गई है जो कर रहे हैं वो संवैधानिक भी है वो लीगल भी है जो SIR किया गया उसमें कानून का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।जब विपक्ष खुद SIR करते थे तब उसको वो ठीक मानते थे आज जब SIR हो रही है तो इसे गलत बोलते हैं ये दोहरा रवैया उनका पूरी तरह से ध्वस्त हुआ है।