US Deportation of Indians: अमेरिका और कनाडा में रह रहे भारतीयों के लिए इमिग्रेशन नियमों को लेकर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अगस्त 2026 के शुरुआती 15 दिनों में अमेरिका से 5,200 से अधिक भारतीयों को डिपोर्ट किए जाने का दावा किया गया है। इनमें अवैध रूप से रह रहे लोगों के अलावा कुछ ऐसे भारतीय भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो H-1B, O-1 और स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका पहुंचे थे। वहीं, कनाडा के अल्बर्टा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) से जुड़े बदलाव के बाद वहां पढ़ाई कर रहे करीब 1,500 भारतीय छात्रों के सामने भी अनिश्चितता बढ़ गई है। हालांकि, डिपोर्टेशन से जुड़े नियम हर व्यक्ति के मामले में उसकी इमिग्रेशन स्थिति और सरकारी आदेशों पर निर्भर करते हैं।
अमेरिका में भारतीयों के डिपोर्टेशन का मुद्दा क्यों चर्चा में?
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका में इमिग्रेशन और अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई है। इसी क्रम में डिटेंशन और रिमूवल की प्रक्रिया तेज होने की बात कही जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त के पहले दो सप्ताह में ही 5,200 से अधिक भारतीयों को अमेरिका से वापस भेजा गया। इस आंकड़े में अलग-अलग तरह के इमिग्रेशन मामलों वाले भारतीयों का जिक्र किया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया केवल वीजा के प्रकार पर निर्भर नहीं करती। वीजा नियमों का उल्लंघन, वैध स्टेटस खत्म होना, रिमूवल ऑर्डर या इमिग्रेशन कोर्ट का फैसला जैसे कई कारण किसी मामले में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
हर तीसरे हफ्ते डिपोर्टेशन फ्लाइट का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2026 में भारतीयों को वापस भेजने के लिए नियमित डिपोर्टेशन फ्लाइट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके मुताबिक, लगभग हर तीसरे सप्ताह ऐसी उड़ान संचालित की गई। भारतीय नागरिकों को अमेरिका से भारत लाने की प्रक्रिया में चार्टर या विशेष उड़ानों का इस्तेमाल होने की जानकारी सामने आती रही है। पिछले साल कुछ भारतीयों को अमेरिकी सैन्य विमान से भारत भेजे जाने के बाद भी यह मुद्दा काफी चर्चा में रहा था।
2025 में 3,567 भारतीयों को किया गया था डिपोर्ट
भारत के विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 3,567 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था। वहीं, जून 2026 तक 1,076 भारतीयों को डिपोर्ट किए जाने की जानकारी भी दी गई थी। इन आंकड़ों की तुलना में अगस्त 2026 के शुरुआती 15 दिनों में 5,200 से ज्यादा भारतीयों के डिपोर्टेशन का दावा काफी बड़ा है। इसलिए इस आंकड़े को लेकर आधिकारिक अमेरिकी और भारतीय स्रोतों से अलग-अलग पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
जून में 801 भारतीयों को रिमूवल ऑर्डर
रिपोर्ट में अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि जून में ही 801 भारतीय नागरिकों को रिमूवल ऑर्डर जारी किए गए थे। रिमूवल ऑर्डर और तत्काल डिपोर्टेशन एक ही प्रक्रिया नहीं हैं। किसी व्यक्ति को रिमूवल ऑर्डर मिलने के बाद उसके पास उपलब्ध कानूनी विकल्प, अपील की स्थिति और मामले के तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय हो सकती है। कुछ मामलों में व्यक्ति स्वेच्छा से भी अमेरिका छोड़ सकता है।
H-1B और दूसरे वैध वीजा धारक भी क्यों चिंता में?
अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के बीच खास चिंता इसलिए भी है क्योंकि कार्रवाई की खबरों में केवल अवैध प्रवासियों का जिक्र नहीं है। H-1B, O-1 और स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका गए लोगों के मामलों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वैध वीजा रखने वाला हर व्यक्ति डिपोर्टेशन के दायरे में आ जाता है। वीजा की शर्तों का उल्लंघन, स्टेटस में बदलाव, नौकरी की स्थिति और किसी कानूनी मामले का परिणाम व्यक्ति के इमिग्रेशन स्टेटस को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से अमेरिका में पढ़ाई या नौकरी कर रहे भारतीयों के लिए अपने दस्तावेज और इमिग्रेशन स्टेटस को लेकर सतर्क रहना महत्वपूर्ण है।
छोटे उल्लंघनों पर भी कार्रवाई के दावे
रिपोर्ट में कुछ ऐसे मामलों का भी उल्लेख है, जिनमें छात्रों या वीजा धारकों के खिलाफ छोटे नियम उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की गई। इसमें ट्रैफिक नियम तोड़ने और सोशल मीडिया पर ट्रंप प्रशासन की आलोचना करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई के दावे शामिल हैं। हालांकि, ऐसे मामलों में डिपोर्टेशन का कारण प्रत्येक व्यक्ति के केस की परिस्थितियों पर निर्भर करता है और किसी एक घटना से सभी वीजा धारकों के लिए सामान्य नियम नहीं बनाया जा सकता। इसी तरह, एक H-1B वीजा धारक की नौकरी जाने और उसके बाद नई नौकरी खोजने के लिए उपलब्ध समय से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया गया है।
रेस्टोरेंट में पार्ट-टाइम काम का मामला
एक अन्य मामले में रिपोर्ट में दावा किया गया कि H-1B या अन्य वीजा स्टेटस पर अमेरिका में मौजूद व्यक्ति एक रेस्तरां में पार्ट-टाइम काम कर रहा था। इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) की कार्रवाई के दौरान उसे हिरासत में लिया गया और वीजा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। ऐसे मामलों में रोजगार की अनुमति व्यक्ति के वीजा और इमिग्रेशन स्टेटस की शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए बिना अनुमति किया गया रोजगार किसी व्यक्ति के इमिग्रेशन केस को प्रभावित कर सकता है।
फरवरी 2025 में 104 भारतीयों को सैन्य विमान से भेजा गया था
अमेरिका से भारतीयों के डिपोर्टेशन को लेकर विवाद फरवरी 2025 में भी काफी बढ़ा था। 5 फरवरी 2025 को 104 भारतीय नागरिकों को अमेरिकी सैन्य विमान से अमृतसर लाया गया था। विमान से लौटे लोगों के हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगाए जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद भारत में इस पर राजनीतिक विवाद हुआ था। मामला संसद में भी उठा और भारतीय नागरिकों के साथ किए गए व्यवहार को लेकर सवाल पूछे गए। इसके बाद अमेरिका से डिपोर्टेशन के दौरान भारतीय नागरिकों के साथ होने वाली प्रक्रिया पर लगातार चर्चा होती रही है।
कनाडा में 1,500 भारतीय छात्रों पर क्यों बढ़ा संकट?
अमेरिका के बाद अब कनाडा के अल्बर्टा में भी भारतीय छात्रों को लेकर स्थिति चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) से जुड़े बदलावों के चलते करीब 1,500 भारतीय छात्रों के सामने अपने आगे के स्टेटस को लेकर परेशानी खड़ी हो गई है। ये छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद कनाडा में काम करने की योजना के तहत आगे बढ़ रहे थे। वर्क परमिट से जुड़ी पात्रता या उसकी समाप्ति उनके भविष्य के इमिग्रेशन विकल्पों को प्रभावित कर सकती है।
छात्रों ने किया प्रदर्शन
अल्बर्टा में प्रभावित छात्रों की ओर से प्रदर्शन किए जाने की जानकारी सामने आई है। छात्रों की मांग है कि उन्हें नौकरी करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और उनके भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जाए। छात्रों का कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद कनाडा में रोजगार हासिल करना उनके पूरे प्लान का हिस्सा था। ऐसे में वर्क परमिट व्यवस्था में अचानक बदलाव से उनकी पढ़ाई, नौकरी और आगे की इमिग्रेशन योजना प्रभावित हो सकती है।
वैध वीजा और वर्क परमिट के बिना रहना मुश्किल
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इमिग्रेशन नियमों को लेकर स्पष्ट किया है कि जिन विदेशी छात्रों के पास कनाडा में रहने का वैध वीजा या वर्क परमिट नहीं है, उन्हें देश छोड़ना पड़ सकता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि किसी छात्र का कनाडा में केवल पढ़ाई करना उसे स्थायी रूप से रहने का अधिकार नहीं देता। पढ़ाई पूरी होने के बाद वहां रुकने के लिए संबंधित इमिग्रेशन नियमों के तहत वैध स्टेटस जरूरी है।
अल्बर्टा के प्रीमियर ने भी दिया सख्त बयान
अल्बर्टा के प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने विदेशी छात्रों के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। उनका कहना है कि स्टडी वीजा एक अस्थायी दस्तावेज है और इसे कनाडा में स्थायी रूप से रहने के अधिकार के तौर पर नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, विदेशी छात्रों को कनाडा के इमिग्रेशन नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अल्बर्टा के कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान सबसे पहले प्रांत के टैक्सपेयर्स की जरूरतों को ध्यान में रखते हैं।
भारतीय छात्रों के लिए क्या मायने रखता है?
अमेरिका और कनाडा में इमिग्रेशन नीतियों में बदलाव का असर भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है। खासकर उन लोगों के लिए स्थिति महत्वपूर्ण है, जिनका वीजा, वर्क परमिट या स्टडी स्टेटस जल्द खत्म होने वाला है। हालांकि, हर व्यक्ति का मामला अलग होता है। केवल किसी देश में पढ़ाई या नौकरी करने से डिपोर्टेशन तय नहीं होता। कार्रवाई संबंधित व्यक्ति के वीजा स्टेटस, नियमों के पालन और इमिग्रेशन अथॉरिटी या अदालत के आदेश पर निर्भर करती है।