मध्यप्रदेश में लंबे समय से संविदा आधार पर सेवाएं दे रहे करीब 2.50 लाख कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। संविदा नीति-2023 में इन दोनों सुविधाओं का प्रावधान किए जाने के बावजूद अलग-अलग विभागों में इसके क्रियान्वयन के लिए जरूरी आदेश जारी नहीं होने से कर्मचारी अब तक इन लाभों से वंचित रहे हैं। अब सरकार की ओर से विभागवार आदेश जारी किए जाने की तैयारी की जा रही है, जिससे पात्र संविदा कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, कर्मचारी संगठनों का कहना है कि नीति बने करीब तीन साल हो चुके हैं और इतने लंबे समय बाद भी इसके प्रावधानों का वास्तविक लाभ कर्मचारियों तक नहीं पहुंचना गंभीर प्रशासनिक समस्या है। संगठनों ने सवाल उठाया है कि जब सरकार ने नीति में लाभ देने का प्रावधान कर दिया था, तो इसे लागू करने में इतनी देरी क्यों हुई?
2.50 लाख संविदा कर्मचारियों को मिल सकता है लाभ
मध्यप्रदेश में अलग-अलग सरकारी विभागों और उनसे जुड़े संस्थानों में बड़ी संख्या में कर्मचारी संविदा आधार पर काम कर रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के करीब 54 विभागों में कार्यरत लगभग ढाई लाख संविदा कर्मचारियों को इसका फायदा मिल सकता है। इन कर्मचारियों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का हिस्सा काफी बड़ा है। अकेले इस विभाग में करीब 50 हजार संविदा कर्मचारी कार्यरत बताए जा रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर शासन की विभिन्न योजनाओं और सेवाओं के संचालन में संविदा कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति जैसे प्रावधानों का लागू होना बड़ी संख्या में कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
संविदा नीति-2023 में क्या है प्रावधान?
राज्य की संविदा नीति-2023 में संविदा कर्मचारियों के लिए कई प्रावधान किए गए थे। इन्हीं में ग्रेच्युटी और सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने की स्थिति में पात्र आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने की व्यवस्था भी शामिल है। नीति के तहत पात्र संविदा कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद 16 माह की ग्रेच्युटी दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। इसका उद्देश्य लंबे समय तक सरकारी विभागों में सेवाएं देने वाले संविदा कर्मचारियों को सेवा समाप्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसके अलावा यदि किसी संविदा कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले उसके आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने की व्यवस्था है। इससे कर्मचारी के परिवार को अचानक आय का स्रोत समाप्त होने की स्थिति में सहारा मिल सकता है।
विभागीय आदेश जारी नहीं होने से अटकी थी प्रक्रिया
नीति में प्रावधान किए जाने के बाद भी इसका लाभ कर्मचारियों को सीधे तौर पर इसलिए नहीं मिल पा रहा था क्योंकि संबंधित विभागों की ओर से आवश्यक विभागीय आदेश जारी नहीं किए गए थे। सरकार की ओर से अब विभागवार आदेश जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। यदि संबंधित विभाग अपने स्तर पर आवश्यक आदेश जारी करते हैं तो पात्र कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति के दावों पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है। यानी नीति में प्रावधान पहले से मौजूद है, लेकिन उसके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के लिए विभागीय स्तर की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
तीन साल से इंतजार कर रहे कर्मचारी
संविदा कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी आपत्ति इसी देरी को लेकर है। उनका कहना है कि वर्ष 2023 में नीति लागू होने के बाद से ही कर्मचारी इन सुविधाओं की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन करीब तीन साल गुजरने के बावजूद बड़ी संख्या में पात्र कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिला। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक इस अवधि में कई कर्मचारी अपनी संविदा सेवा पूरी कर चुके हैं, लेकिन उन्हें ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं हो सका। इसी तरह कुछ कर्मचारियों की सेवाकाल के दौरान मृत्यु भी हुई है। ऐसे मामलों में उनके परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मिलने का इंतजार है। कर्मचारियों का तर्क है कि नीति में जब सरकार ने दोनों सुविधाओं को स्थान दिया है, तो विभागीय स्तर पर आदेश जारी करने में देरी का खामियाजा कर्मचारियों और उनके परिवारों को नहीं भुगतना चाहिए।
रमेश राठौर बोले- जिम्मेदार अधिकारियों पर हो कार्रवाई
मध्यप्रदेश संविदा अधिकारी-कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रमेश राठौर ने सरकार से इस मामले में स्पष्ट कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि संविदा नीति-2023 में ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है, इसलिए इन सुविधाओं को लागू करने में तीन साल की देरी उचित नहीं है। राठौर के मुताबिक वर्ष 2023 से ही पात्र कर्मचारियों को इन प्रावधानों का लाभ मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जिन विभागों में अब तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है, वहां जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इन तीन वर्षों के दौरान ऐसे कर्मचारी भी रहे हैं जिन्होंने अपनी सेवा पूरी कर ली, लेकिन उन्हें ग्रेच्युटी नहीं मिली। वहीं सेवाकाल में मृत्यु के मामलों में संबंधित परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं मिलने से उनकी परेशानी और बढ़ी है।
जितेंद्र सिंह भदौरिया ने भी उठाया सवाल
मप्र संविदा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह भदौरिया ने भी नीति के क्रियान्वयन में हुई देरी पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि सरकार ने तीन साल पहले संविदा कर्मचारियों के हित में नीति बनाई, लेकिन उसके प्रावधानों को लागू नहीं किया जाना कर्मचारियों के हितों के साथ न्याय नहीं है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि विभागीय आदेश जारी करने की प्रक्रिया में अब और देरी नहीं की जाए और पात्र कर्मचारियों को उनके अधिकार के अनुसार लाभ उपलब्ध कराया जाए।
किन कर्मचारियों को होगा फायदा?
विभागीय आदेश जारी होने के बाद संबंधित नियमों और पात्रता के आधार पर कर्मचारियों को लाभ दिया जाएगा। इसका दायरा प्रदेश के करीब 54 विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों तक बताया जा रहा है। सबसे बड़ा लाभ उन कर्मचारियों को मिल सकता है जो लंबे समय तक संविदा सेवा में रहने के बाद सेवानिवृत्त या सेवा से बाहर हो चुके हैं और नीति के तहत ग्रेच्युटी के पात्र हैं। इसके अलावा सेवाकाल के दौरान मृत्यु वाले मामलों में पात्र आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का रास्ता भी खुल सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ किस तारीख से और किन शर्तों के आधार पर दिया जाएगा, यह संबंधित विभागों द्वारा जारी किए जाने वाले आदेशों और उनमें तय पात्रता पर निर्भर करेगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारियों का मुद्दा भी चर्चा में
इसी बीच पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ा एक अन्य मामला भी सामने आया है। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) में पदस्थ सहायक यंत्रियों और उपयंत्रियों को मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPRDA) में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए एनओसी जारी किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, इस प्रतिनियुक्ति को लेकर विभागों और प्राधिकरण के बीच औपचारिक सहमति का मुद्दा सामने आया है। इसी वजह से कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा रही है। यह मामला संविदा कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति से अलग है, लेकिन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में चल रही प्रशासनिक गतिविधियों के कारण इसे भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब विभागीय आदेश पर टिकी नजर
संविदा कर्मचारियों के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि सरकार की नीति में प्रावधान होने के बाद अब विभागवार आदेश कब जारी होते हैं। यदि सभी संबंधित विभाग आवश्यक आदेश जारी कर देते हैं तो वर्षों से लंबित ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सरकार केवल आदेश जारी करने तक सीमित न रहे, बल्कि पात्र कर्मचारियों को वास्तविक लाभ मिलने की प्रक्रिया की भी निगरानी करे। इससे उन कर्मचारियों और परिवारों को राहत मिल सकेगी जो लंबे समय से इन सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं।