सतना/चित्रकूट। मध्य प्रदेश के सतना और उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में लगातार दो दिन से हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी इस सीजन के सबसे बड़े उफान पर पहुंच गई, जिसके बाद रामघाट, भरतघाट और लंका तिराहा समेत कई इलाके जलमग्न हो गए। मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 130 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने के बाद सड़कों पर पानी भर गया और कई स्थानों पर नावों से आवाजाही करनी पड़ी। करीब 200 दुकानों और सैकड़ों घरों में पानी घुसने की जानकारी सामने आई है।
रामघाट के रास्ते बंद, बैरिकेडिंग कर रोका आवागमन
पहाड़ी इलाकों में बारिश थमने के बाद दोपहर तक मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ना रुका, लेकिन प्रशासन ने एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी है। रामघाट जाने वाले दोनों रास्तों पर बैरिकेडिंग कर आवागमन बंद कर दिया गया है। आरोग्यधाम मार्ग पर भी पानी भरने के कारण वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। कामदगिरि, भरतघाट, सती अनुसुइया और गुप्त गोदावरी जाने वाले रास्ते भी प्रभावित हुए हैं। भरतघाट का अधिकांश आरती स्थल पानी में डूब गया है।
पुलिस और SDRF की टीमें तैनात
बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए पुलिस, SDERF, प्रशासन और नगर परिषद की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है। प्रमोद वन सामुदायिक भवन में करीब 70 लोगों की क्षमता वाला अस्थायी आश्रय स्थल तैयार किया गया है। प्रशासन ने लोगों से जलमग्न सड़कों, पुल-पुलियों और नदी किनारे जाने से बचने की अपील की है। बारिश, जलभराव या किसी अन्य आपात स्थिति की सूचना कलेक्टर कार्यालय के हेल्पलाइन नंबर 07672-223211 पर देने को कहा गया है।
सतना शहर में भी जलभराव से परेशानी
सतना शहर के कई इलाकों और सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है। स्कूल परिसरों में भी पानी भर गया। संदीपनी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मुख्य द्वार जलमग्न हो गया, जबकि करही खुर्द स्कूल के अंदर तक पानी पहुंच गया। देवरी कैंप स्कूल चारों ओर पानी से घिर गया, जिससे वह टापू जैसा नजर आया। इसके अलावा कई स्थानों पर कच्चे मकानों के गिरने की भी सूचना है।
कोटर और रामपुर बघेलान में भी बिगड़े हालात
कोटर नगर में बस स्टैंड की दुकानें, अस्पताल, नगर परिषद कार्यालय और कई सड़कें पानी में डूब गईं। नदियों और नालों के उफान पर होने से स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रामपुर बघेलान की लामीकरही बस्ती में करीब पांच फीट तक पानी भरने के बाद कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े। ग्रामीणों ने सरकारी नाले और जमीन पर अतिक्रमण को जलभराव की बड़ी वजह बताते हुए सड़क जाम कर स्थायी समाधान की मांग की।
कई मार्गों पर आवागमन बंद
भारी बारिश के कारण कई नदियों और रपटों के उफान पर आने से रास्ते बंद किए गए हैं।
- मझगवां-मानिकपुर मार्ग: बभियां गांव का रपटा डूबा।
- पिंडरा नदी: पानी घरों में घुसा।
- मझगवां: एक कच्चे मकान की दो दीवारें गिर गईं।
- बिरसिंहपुर-सेमरिया मार्ग: मऊ नदी के उफान के कारण आवागमन बंद।
- असरावल, सेमरावल, तुर्री और नदना नदियां भी उफान पर हैं।
- इन हालात के कारण कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
टमस नदी खतरे के निशान के करीब
उधर टमस नदी का जलस्तर 287.16 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि खतरे का निशान 289 मीटर बताया जा रहा है। लगातार बारिश और बाणसागर-बकिया बैराज के गेट खुलने से रीवा-त्योंथर के तराई क्षेत्रों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन की टीमें संवेदनशील इलाकों में निगरानी कर रही हैं और लोगों से नदी-नालों के पास नहीं जाने तथा जलमग्न रास्तों को पार करने से बचने की अपील की जा रही है।