कनाडाई कानून प्रवर्तन एजेंसी रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस यानी आरसीएमपी 1985 के एयर इंडिया फ्लाइट 182 कनिष्का बमबारी मामले की जांच को सीमित करने पर विचार कर रही है। लीड्स की कमी को कारण बताते हुए टास्क फोर्स का आकार घटाने की तैयारी चल रही है। पीड़ित परिवारों के सदस्य और कनिष्का फाउंडेशन के अध्यक्ष संजय लजार ने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को पत्र लिखकर इस बात की जानकारी दी है। 12 सितंबर को हुई बैठक में जांच की प्रगति पर चर्चा के दौरान यह बात सामने आई। परिवारों में इससे गहरा आघात पहुंचा है।
संजय लजार का पत्र और व्यक्तिगत त्रासदी
मुंबई स्थित संजय लजार ने व्यक्तिगत रूप से कनाडा जाकर बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने पत्र में लिखा कि जांच छोड़ने, टास्क फोर्स घटाने और मामले को निष्क्रिय स्थिति में डालने की तैयारी से वे स्तब्ध हैं। लजार ने इस बमबारी में अपने पूरे परिवार माता-पिता और छोटी बहन को खोया था। बैठक में कई परिवारजन भावुक हो गए और नाराजगी जताई। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि जांच जारी रखी जाए, इनाम बढ़ाया जाए और दोषियों को पकड़ने के प्रयास तेज किए जाएं। पत्र की प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत और कनाडा के विदेश मंत्रियों तथा आरसीएमपी कमिश्नर को भी भेजी गई है।
कनिष्का बमबारी की ऐतिहासिक त्रासदी
23 जून 1985 को एयर इंडिया फ्लाइट 182 कनिष्का पर खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा किए गए बम धमाके में 329 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें ज्यादातर कनाडाई नागरिक थे। यह कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जाता है। दशकों बीत जाने के बाद भी कई दोषी अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं। जांच में बार-बार बाधाएं आने से पीड़ित परिवार न्याय की आस लगाए बैठे हैं। वर्तमान में खालिस्तानी और अन्य उग्रवाद की बढ़ती गतिविधियां इस जांच को और अधिक प्रासंगिक बनाती हैं।
जांच जारी रखने की अपील
संजय लजार ने अपने पत्र में जोर देकर कहा कि बढ़ते खालिस्तानी उग्रवाद को देखते हुए जांच को बंद या निष्क्रिय नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मजबूत प्रयासों, बड़े इनाम और खुफिया एजेंसियों की सक्रियता की मांग की। परिवारजन चाहते हैं कि दोषियों तक पहुंचने के लिए नई रणनीति अपनाई जाए। कनाडाई अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे इस संवेदनशील मामले को प्राथमिकता दें। पीड़ित परिवारों का कहना है कि इतने बड़े आतंकी हमले की जांच अधूरी छोड़ना न्याय की अवहेलना होगी।
भारत-कनाडा संबंध और आगे की उम्मीद
इस मामले में भारत भी लगातार दिलचस्पी रखता रहा है। पत्र में भारतीय प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री को भी सूचित किया गया है जिससे द्विपक्षीय स्तर पर चर्चा की संभावना बढ़ गई है। कनाडा में उग्रवाद की चुनौती को देखते हुए दोनों देश सहयोग बढ़ा सकते हैं। पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं कि जांच फिर से सक्रिय होगी। आरसीएमपी और कनाडाई सरकार के अगले कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे। 329 जानों के इस कांड में सच्चाई सामने आने तक परिवारों का संघर्ष जारी रहने की संभावना है।