चीन - तिब्बत और नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ व भूस्खलन के बीच दोनों देशों में राहत और बचाव अभियान जारी है। जहां नेपाल में प्रभावित इलाकों से लगातार जमीनी रिपोर्टिंग सामने आ रही है, वहीं तिब्बत में आपदा से जुड़ी सूचनाओं को लेकर चीन ने कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, चीनी सेंसर सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म से आपदा की तस्वीरें और वीडियो हटा रहे हैं।

मृतकों और लापता लोगों की संख्या बताने पर रोक
रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी मीडिया से जुड़े पत्रकारों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को आधिकारिक घोषणा होने तक मृतकों और लापता लोगों की संख्या प्रकाशित नहीं करने की हिदायत दी गई है। चीन में आपदा से संबंधित सूचनाओं को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से ऑनलाइन गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। खासतौर पर बिना आधिकारिक पुष्टि के आंकड़े साझा करने वाले पोस्ट को हटाए जाने की बात सामने आई है।

सोशल मीडिया पोस्ट करने वालों पर कार्रवाई
आपदा के बाद कुछ ऐसे लोगों के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई किए जाने की खबर है, जिन्होंने मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, कार्रवाई में आर्थिक जुर्माने से लेकर हिरासत तक के प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया। कुछ मामलों में 150 डॉलर तक का जुर्माना या 10 दिन तक की हिरासत जैसी कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।

नेपाल और तिब्बत में रिपोर्टिंग का अलग तरीका
आपदा के बाद नेपाल और तिब्बत में मीडिया कवरेज के तरीकों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। नेपाल में विदेशी पत्रकार प्रभावित क्षेत्रों में जाकर स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों से बातचीत कर रहे हैं। वहां से राहत अभियान, नुकसान और प्रभावित लोगों की स्थिति की जानकारी सामने आ रही है। इसके विपरीत, तिब्बत में विदेशी पत्रकारों के लिए प्रभावित क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से जाकर रिपोर्टिंग करना आसान नहीं है। इससे वहां आपदा की वास्तविक स्थिति और नुकसान से जुड़ी स्वतंत्र जानकारी हासिल करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
चीन ने आरोपों को बताया दुर्भावनापूर्ण अटकलें
तिब्बत में आपदा की सूचनाओं पर कथित सेंसरशिप और मीडिया प्रतिबंधों से जुड़े आरोपों को चीन सरकार पहले भी खारिज करती रही है। चीनी अधिकारियों का रुख रहा है कि इस तरह के दावे दुर्भावनापूर्ण अटकलों पर आधारित हैं। फिलहाल तिब्बत और नेपाल दोनों जगह राहत एवं बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जारी हैं। ऐसे में आपदा से जुड़ी सूचनाओं की पारदर्शिता और प्रभावित क्षेत्रों तक स्वतंत्र मीडिया की पहुंच को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बनी हुई है।