पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच मंगलवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों पर कथित तौर पर ईरानी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत हो गई, जबकि छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक घायल हो गए। घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए नई दिल्ली में ईरान के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन (DCM) मोहम्मद जवाद होसैनी समेत ईरानी राजनयिकों को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया।
कैसे हुआ हमला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, UAE के तेल टैंकर 'मोम्बासा' और 'अल बहियाह' ओमान के क्षेत्रीय जल से होते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन पर दो क्रूज मिसाइलें दागी गईं। हमले के बाद दोनों जहाजों में भीषण आग लग गई, हालांकि बाद में आग पर काबू पा लिया गया। जहाजों को नुकसान पहुंचा है और उनकी तकनीकी जांच की जा रही है।
भारतीय नाविक की मौत, कई घायल
हमले में एक भारतीय नाविक की जान चली गई। इसके अलावा कुल आठ लोग घायल हुए, जिनमें छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका इलाज स्थानीय अस्पतालों में जारी है।
भारत सरकार का सख्त रुख
घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने ईरान के वरिष्ठ राजनयिकों को तलब किया और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कड़ी चिंता जताई। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारतीय दूतावास ने क्या कहा?
संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय दूतावास ने मृत भारतीय नाविक के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया है। दूतावास ने कहा कि वह स्थानीय प्रशासन और UAE सरकार के संपर्क में है तथा घायलों और उनके परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
UAE ने हमले की कड़ी निंदा की
UAE के रक्षा मंत्रालय ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा बढ़ गया है। UAE ने यह भी कहा कि वह अपने नागरिकों, रणनीतिक परिसंपत्तियों और समुद्री हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्र के रास्ते होने वाले कच्चे तेल के बड़े हिस्से का परिवहन इसी मार्ग से होता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, शिपिंग उद्योग और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
क्या बढ़ सकता है वैश्विक संकट?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बढ़ता है, तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। हालिया हमले के बाद शिपिंग कंपनियां भी इस मार्ग पर जहाज भेजने को लेकर सतर्क हो गई हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। बड़ी संख्या में भारतीय नाविक और पेशेवर भी इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव भारत के लिए केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या?
हमले के बाद पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब ईरान, UAE और अन्य संबंधित देशों की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।