तेलअबीब. बृहस्पतिवार को जारी अंतिम नतीजों के अनुसार नेतन्याहू के गठबंधन को 120 सदस्यीय नेसेट में 53 सीटें मिली हैं। पिछली संसद में अधिकतम 68 सीटों की तुलना में यह काफी कम है। मंगलवार को हुए मतदान के बाद एग्जिट पोल में ही झटके के संकेत मिल गए थे। मतगणना पूरी हो चुकी है लेकिन नतीजों को आधिकारिक मंजूरी मिलनी बाकी है। इन्हें अगले बुधवार को राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। गठबंधन की सीटों में गिरावट ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। नेतन्याहू खेमे में निराशा साफ दिख रही है।
सीटों का बंटवारा और गठबंधन की स्थिति
मुख्य विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं जबकि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को कुल 19 सीटें हासिल हुई हैं। नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे रह गया है। अरब दलों के ऐतिहासिक प्रदर्शन ने समीकरणों को प्रभावित किया है। यदि विपक्षी पार्टियां अरब दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने पर सहमत होती हैं तो बहुमत हासिल किया जा सकता है। ऐसा गठबंधन राजनीतिक रूप से असामान्य और जोखिम भरा माना जा रहा है। सीटों के इस बंटवारे ने नई संभावनाएं और जटिलताएं दोनों पैदा की हैं। गठबंधन की गणित अब कठिन हो गई है।
लिकुड के आरोप और विदेशी हाथ की आशंका
नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने अरब नेतृत्व वाली पार्टियों पर चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। पार्टी ने आशंका जताई है कि इस कथित साजिश में विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है। एग्जिट पोल के बाद से ही ये आरोप लगाए जा रहे हैं। चुनाव समिति के प्रमुख और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश नोआम सोहल्बर्ग के बयान ने आरोपों को हवा दी। उन्होंने विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े गंभीर संदेह रखे जाने की बात कही थी। लिकुड नतीजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है। आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है।
विपक्ष का जवाब और अरब दलों का प्रदर्शन
विपक्ष ने नेतन्याहू पर अरब आबादी को निशाना बनाने और चुनाव की विश्वसनीयता को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद ये आरोप लगाए जा रहे हैं। विपक्ष नतीजों को स्वीकार करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने की बात कर रहा है। अरब दलों के मजबूत प्रदर्शन ने राजनीतिक परिदृश्य को नया आयाम दिया है। नेतन्याहू खेमे की ओर से नतीजों को अमान्य ठहराने की कोशिश का आरोप लगाया गया है। दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक जारी है।
संभावित गठबंधन और चुनौतियां
विपक्षी पार्टियां यदि अरब दलों के साथ समझौता करती हैं तो सरकार बना सकती हैं। लेकिन ऐसा गठबंधन असामान्य और जोखिम भरा होगा क्योंकि राजनीतिक और वैचारिक अंतर काफी गहरे हैं। नेतन्याहू खेमा भी अन्य दलों के साथ जोड़-तोड़ की कोशिश कर सकता है। गठबंधन की स्थिरता और दीर्घकालिक टिकाऊपन पर सवाल बने रहेंगे। इजरायल की राजनीति में गठबंधन सरकारें आम हैं लेकिन वर्तमान समीकरण जटिल हैं। सत्ता गठन की प्रक्रिया अब गहन चर्चा और सौदेबाजी का विषय बन गई है।
आधिकारिक प्रक्रिया और आगे की राह
नतीजों को अगले बुधवार को राष्ट्रपति के समक्ष पेश किया जाएगा जिसके बाद सरकार गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी। चुनाव अधिकारियों ने मतगणना पूरी होने की पुष्टि कर दी है। आरोपों की जांच और कानूनी पहलुओं पर भी नजर रहेगी। राजनीतिक दल अपनी रणनीति तय करने में जुट गए हैं। स्थिर सरकार बनाने के लिए व्यापक सहमति की जरूरत होगी। इजरायल की जनता अब नई सरकार के गठन का इंतजार कर रही है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अगले चरण की ओर देश बढ़ रहा है।