इस्लामाबाद: पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले दो दिनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कम से कम 30 निहत्थे प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की खबर है। स्थानीय नागरिक अधिकार संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं और बाद में साक्ष्य मिटाने के लिए शवों को भी गायब कर दिया। पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और फोन सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी गई हैं, जिससे स्थिति की सटीक जानकारी बाहर नहीं आ पा रही है।
चुनाव में धांधली और अधिकारों को लेकर भड़का जनाक्रोश
इस क्षेत्र में चुनावी सुधारों, राजनीतिक अधिकारों और महंगाई को लेकर पिछले कई महीनों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को लेकर है, जिनके जरिए इस्लामाबाद की केंद्र सरकार इस क्षेत्र की राजनीति पर अपना सीधा नियंत्रण बनाए रखती है। सोमवार को हुए चुनावों के दौरान जनता ने इस व्यवस्था के खिलाफ बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरकर विरोध जताया था।
शवों को गायब करने और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप
अवामी एक्शन कमेटी के प्रवक्ताओं का कहना है कि सुरक्षा बलों ने मीरपुर में प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने के बाद अस्पतालों को बंद कर दिया और सड़कों पर पड़े शवों को उठाकर अज्ञात जगहों पर भेज दिया। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने क्षेत्र में संचार सेवाओं (इंटरनेट/मोबाइल) पर लगे प्रतिबंध को तुरंत हटाने की मांग की है, ताकि हिंसा की निष्पक्ष जांच हो सके और मानवाधिकारों के हनन पर रोक लगाई जा सके।
पाकिस्तानी सरकार की सफाई और भारत पर अनर्गल आरोप
दूसरी ओर, पाकिस्तानी सरकार ने इन हत्याओं में सुरक्षा बलों की भूमिका से इनकार किया है। सरकार के मंत्रियों का दावा है कि प्रदर्शनों को भारत से आर्थिक मदद और दिशा-निर्देश मिल रहे हैं। हालांकि, स्थानीय संगठनों ने पाकिस्तान सरकार के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि अपने बुनियादी हक मांगने वाले स्थानीय नागरिकों को अक्सर भारत-समर्थित बताकर दबाने की कोशिश की जाती है।