वॉशिंगटन/रोम: अमेरिकी राजनीति के प्रमुख चेहरे Donald Trump और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni के बीच संबंधों में खटास अब खुलकर सामने आने लगी है। हालिया बयानबाजी ने दोनों नेताओं के बीच दूरी को और बढ़ा दिया है, जिसकी जड़ में पोप को लेकर उठा विवाद और ईरान युद्ध पर मतभेद बताए जा रहे हैं।
पोप पर टिप्पणी बनी टकराव की वजह
विवाद उस समय गहराया जब ट्रंप ने Pope Leo XIV के बयानों की आलोचना की। पोप ने वैश्विक स्तर पर युद्ध और हिंसा के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शांति का संदेश दिया था, जिस पर ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें पक्षपाती करार दिया। ट्रंप के इस रुख को मेलोनी ने सार्वजनिक रूप से अस्वीकार्य बताया, जिससे दोनों के बीच असहजता बढ़ गई।
ईरान मुद्दे पर भी मतभेद स्पष्ट
Iran से जुड़े तनाव और संभावित सैन्य टकराव पर भी अमेरिका और इटली की सोच अलग-अलग नजर आ रही है। ट्रंप जहां आक्रामक रुख अपनाने के पक्ष में दिखे, वहीं मेलोनी पहले ही साफ कर चुकी हैं कि इटली किसी भी युद्ध में शामिल होने के पक्ष में नहीं है। इस मुद्दे ने भी दोनों नेताओं के बीच दूरी को और गहरा कर दिया है।
ट्रंप का तीखा हमला, मेलोनी का संयमित जवाब
एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने मेलोनी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें उनसे ज्यादा दृढ़ता की उम्मीद थी। दूसरी ओर, मेलोनी ने सीधे पलटवार से बचते हुए सिर्फ इतना कहा कि धार्मिक नेताओं पर व्यक्तिगत हमले स्वीकार्य नहीं हैं। उनके इस संतुलित रुख को कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी तेज
इस विवाद ने वैश्विक नेताओं का ध्यान भी खींचा है। ब्राजील के राष्ट्रपति Luiz Inácio Lula da Silva ने पोप के समर्थन में बयान देते हुए ट्रंप की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जो लोग शांति की बात करते हैं, वे अक्सर शक्तिशाली राजनीतिक हमलों का निशाना बनते हैं।
राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद इटली की घरेलू राजनीति में मेलोनी के लिए अवसर भी बन सकता है। आर्थिक चुनौतियों और हालिया राजनीतिक दबावों के बीच यह मुद्दा उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग पहचान मजबूत करने का मौका दे सकता है।
वैश्विक रिश्तों में नई दरार के संकेत
ट्रंप और मेलोनी के बीच बढ़ती तल्खी केवल व्यक्तिगत मतभेद नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी मानी जा रही है। खासतौर पर पश्चिमी देशों के भीतर रणनीतिक और वैचारिक मतभेद अब पहले से ज्यादा स्पष्ट होते दिख रहे हैं।