अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को एचआर 5334 यानी लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 पर साइन कर दिया। व्हाइट हाउस के अनुसार यह कानून रूस के खिलाफ मौजूदा प्रतिबंधों को और मजबूत करता है। रूस के एनर्जी और डिफेंस सेक्टर से जुड़े लोगों तथा संस्थाओं पर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया है। ईरान से जुड़े कुछ प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाया गया है। कानून बनने के बाद इसके क्रियान्वयन के लिए 30 दिन की समयसीमा दी गई है। भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं।
100% टैरिफ का प्रावधान
इस कानून के तहत राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल या नेचुरल गैस खरीदने वाले टॉप पांच देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। भारत और चीन रूसी एनर्जी के बड़े खरीदार होने के कारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। हालांकि कानून पर साइन करने का मतलब यह नहीं कि भारत से अमेरिका जाने वाले सभी सामान पर तुरंत 100% टैरिफ लग गया है। वास्तविक कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि किन देशों को टॉप खरीदार माना जाता है और प्रशासन कितनी दर का टैरिफ लागू करता है। कानून राष्ट्रपति को शर्तों के तहत यह शक्ति प्रदान करता है।
सीनेट और हाउस में पास होने की प्रक्रिया
कानून बनने से पहले बिल को अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों में समर्थन मिला। सीनेट ने 7 अगस्त को इसे 86-11 वोट से पास किया। इसके बाद 16 सितंबर को हाउस ने 262-159 वोट से मंजूरी दी और राष्ट्रपति के पास भेजा। सीनेट में दोनों पार्टियों के सांसदों का समर्थन मिला। हाउस में कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति को इतनी व्यापक टैरिफ शक्ति दिए जाने पर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। इसके बावजूद बिल पास हो गया।
लिंडसे ओ ग्राहम के नाम पर कानून
इस कानून का नाम दिवंगत सीनेटर लिंडसे ओ ग्राहम के नाम पर रखा गया है। ग्राहम की जुलाई 2026 में अचानक मृत्यु हो गई थी। उनकी जगह उनकी बहन डार्लिन ग्राहम को दक्षिण कैरोलिना से सीनेट की सीट के बाकी कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया। ग्राहम लंबे समय से रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के समर्थक रहे और इस बिल पर सक्रिय रहे। उनके नाम पर कानून पारित होना उनकी विरासत को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
भारत के लिए संभावित प्रभाव
भारत के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि अमेरिकी प्रशासन इस कानून को कैसे लागू करता है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। यदि भारत को टॉप खरीदारों की सूची में शामिल किया जाता है और टैरिफ लागू होता है तो अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल कानून बनने के बाद अगला कदम प्रशासन की ओर से क्रियान्वयन संबंधी फैसले होंगे। व्यापारिक संबंधों और ऊर्जा सुरक्षा दोनों दृष्टियों से नई दिल्ली में इस विकासक्रम पर नजर रखी जा रही है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका है।