भोपाल: मध्यप्रदेश के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में रविवार, 11 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में करीब 100 साल बाद जंगली भैंसों को फिर से बसाने की पहल आगे बढ़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए आठ जंगली भैंसों को क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े से निकालकर 17 हेक्टेयर में बने बड़े बाड़े में छोड़ा। इस पहल का उद्देश्य इन वन्यजीवों को मध्यप्रदेश की जलवायु और पर्यावरण के अनुकूल बनाकर उनके प्राकृतिक आवास में दोबारा स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। करीब एक सदी बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना के दूसरे चरण की शुरुआत हुई है। उन्होंने बताया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से आठ जंगली भैंसों को लगभग 2,200 किलोमीटर की दूरी तय कर मध्यप्रदेश लाया गया है। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

दो चरणों में काजीरंगा से मध्यप्रदेश लाए गए आठ जंगली भैंसे
जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत सभी आठ भैंसों को दो चरणों में असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से कान्हा टाइगर रिजर्व लाया गया था। पहले चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को सूपखार परिक्षेत्र में तैयार किए गए एक हेक्टेयर के बाड़े में रखा गया। इसके बाद 9 मई 2026 को तीन मादा और एक नर को इसी बाड़े में लाया गया।
इस तरह कुल छह मादा और दो नर जंगली भैंसों को निर्धारित अवधि तक क्वारंटाइन में रखा गया, ताकि वे नए वातावरण और स्थानीय जलवायु के अनुकूल हो सकें। आवश्यक अवधि पूरी होने के बाद 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने सभी आठ भैंसों को 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी कराई। यह कदम उन्हें धीरे-धीरे प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल बनाने की योजना का हिस्सा है।
तीन साल में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य
मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों में जंगली भैंसों की मौजूदगी करीब 100 साल पहले समाप्त हो गई थी। अब इस प्रजाति को फिर से स्थापित करने के लिए वन विभाग ने विशेष पुनर्स्थापना योजना तैयार की है। सूपखार क्षेत्र में पहले जंगली भैंसों की मौजूदगी के प्रमाण मिलने के आधार पर इस स्थान को परियोजना के लिए चुना गया है।
परियोजना के तहत अगले तीन वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को क्षेत्र में बसाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से प्रदेश में जैव-विविधता को बढ़ावा देने, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को मजबूत करने और दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।

वन्यजीव संरक्षण के साथ विकास पर भी सरकार का जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को दोबारा स्थापित करने और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य विकसित कर चीतों के लिए तीसरा ठिकाना तैयार करने की पहल भी की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश से नक्सलवाद के खात्मे के बाद इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। सरकार का प्रयास है कि वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र में विकास की गतिविधियों को भी आगे बढ़ाया जाए।
कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना की यह पहल प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों के लिए अहम मानी जा रही है। अब परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जंगली भैंसे नए वातावरण में कितनी अच्छी तरह ढलते हैं और उन्हें भविष्य में प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से बसाने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।