मध्य प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रवेश हो चुका है। सामान्यतः 15 जून के आसपास प्रदेश में पहुंचने वाला मानसून इस बार लगभग नौ दिन की देरी से आया है। बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी के मार्ग से प्रदेश में प्रवेश करने वाले मानसून ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आगामी तीन से चार दिनों के भीतर मानसून प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को अपनी चपेट में ले लेगा, जिससे वर्षा गतिविधियों में और तेजी आएगी।
कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने प्रदेश के अनेक जिलों के लिए आंधी, गरज-चमक और वर्षा की चेतावनी जारी की है। राजधानी भोपाल सहित इंदौर, उज्जैन, देवास, सीहोर, शाजापुर, धार, खरगोन, नर्मदापुरम, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, सिवनी, रीवा, मऊगंज और सिंगरौली जैसे जिलों में मौसम के अचानक बिगड़ने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार तेज हवाओं के साथ होने वाली बारिश कई स्थानों पर जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों और किसानों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
आकाशीय बिजली और ओलावृष्टि ने बढ़ाई चिंता
पिछले चौबीस घंटों के दौरान प्रदेश के अनेक हिस्सों में मौसम का असर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई, जबकि बालाघाट में ओलावृष्टि की घटनाएं भी सामने आईं। मानसूनी बादलों के साथ सक्रिय संवहनीय गतिविधियों के कारण आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और विद्युत खंभों के आसपास खड़े रहने से बचना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतना आवश्यक है क्योंकि आकाशीय बिजली हर वर्ष जान-माल की हानि का कारण बनती है।
कुछ जिलों में बारिश तो कहीं लू का असर
जहां प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा और बादलों का प्रभाव बढ़ रहा है, वहीं कुछ जिलों में मौसम अभी भी शुष्क बना हुआ है। मुरैना, नीमच, भिंड, श्योपुर, मंदसौर, रीवा और सिंगरौली जैसे क्षेत्रों में फिलहाल व्यापक वर्षा की संभावना कम बताई गई है। दूसरी ओर सीधी जिले में लू चलने की आशंका व्यक्त की गई है। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम का प्रभाव एक समान नहीं है। ऐसे में नागरिकों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर विशेष ध्यान देने और परिस्थितियों के अनुसार अपनी दिनचर्या में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
सामान्य से काफी कम रही जून की वर्षा
मध्य प्रदेश में इस वर्ष जून माह के दौरान वर्षा का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार एक जून से अब तक प्रदेश में औसतन 78.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविक वर्षा मात्र 37.1 मिलीमीटर ही रिकॉर्ड की गई है। यह सामान्य से लगभग 53 प्रतिशत कम है। वर्षा की इस बड़ी कमी ने जल संसाधनों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दिनों में यदि मानसून सक्रिय बना रहता है तो वर्षा की कमी की कुछ हद तक भरपाई संभव हो सकती है।
खरीफ फसलों पर पड़ा मौसम का सीधा असर
मानसून की देरी और कम वर्षा का सबसे अधिक प्रभाव कृषि क्षेत्र पर देखने को मिला है। विशेष रूप से सोयाबीन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में किसान पर्याप्त वर्षा का इंतजार कर रहे हैं ताकि खेतों में आवश्यक नमी उपलब्ध हो सके। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होने पर बुवाई कार्यों में तेजी आएगी और किसानों को राहत मिलेगी। प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर है, इसलिए आने वाले दिन कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
तापमान में गिरावट के बावजूद सतर्कता जरूरी
बारिश और बादलों की मौजूदगी के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। पर्वतीय पर्यटन स्थल पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा क्षेत्र बना हुआ है, जबकि कुछ जिलों में अब भी तापमान 41 डिग्री सेल्सियस से अधिक रिकॉर्ड किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, सुरक्षित स्थानों पर रहने और आकाशीय बिजली से बचाव संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। अगले 72 घंटे मौसम की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जा रहे हैं और इस दौरान सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव साबित हो सकती है।