इस वर्ष मॉनसून की शुरुआत उम्मीदों के अनुरूप हुई थी, लेकिन केरल पहुंचने के बाद इसकी रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई। लगभग एक सप्ताह तक इसकी प्रगति सीमित रहने से देश के कई हिस्सों में बारिश का इंतजार लंबा हो गया। अब मौसमीय परिस्थितियों में सुधार के साथ मॉनसून ने एक बार फिर गति पकड़ ली है और तेजी से उत्तर तथा मध्य भारत की ओर बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आगामी दिनों में इसकी सक्रियता और बढ़ेगी, जिससे लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे क्षेत्रों को राहत मिलने की संभावना है।
मध्य भारत को भिगोते हुए उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ा मानसूनी तंत्र
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के शेष क्षेत्रों को अपने प्रभाव क्षेत्र में ले लिया है। इन राज्यों में सक्रिय होने के बाद अब इसका अगला प्रमुख पड़ाव उत्तर प्रदेश माना जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में अगले दो से तीन दिनों के भीतर मॉनसूनी गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। वातावरण में नमी की बढ़ती मात्रा, अनुकूल पवन प्रणाली और बदलते दबाव क्षेत्र इस बात का संकेत दे रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में मानसून का आगमन अब अधिक दूर नहीं है।
किसानों और जल संसाधनों के लिए राहत की खबर
उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था काफी हद तक मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है। खरीफ फसलों की बुवाई और उनकी प्रारंभिक वृद्धि के लिए समय पर वर्षा अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। पिछले कुछ सप्ताह से बारिश की कमी के कारण कई क्षेत्रों में किसान चिंतित दिखाई दे रहे थे, लेकिन अब मानसून की सक्रियता ने उम्मीदों को फिर से जीवित कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा होती है तो खेतों में नमी बढ़ेगी, जलाशयों का स्तर सुधरेगा और कृषि गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
महाराष्ट्र से पूर्वोत्तर तक बारिश का व्यापक असर
मॉनसून की नई सक्रियता का प्रभाव केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र के मुंबई, रायगढ़, सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी जैसे जिलों में भारी वर्षा का दौर जारी है। कई स्थानों पर रिकॉर्ड स्तर की बारिश दर्ज की गई है, जिसके चलते मौसम विभाग ने सतर्कता संबंधी चेतावनियां भी जारी की हैं। दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी अत्यधिक वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। यह स्थिति दर्शाती है कि मानसूनी प्रणाली अब पूरे देश में व्यापक रूप से प्रभावी होने लगी है।
जून में बारिश की भारी कमी ने बढ़ाई थी चिंता
देशभर में जून माह के शुरुआती 23 दिनों के दौरान सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में औसत वर्षा की तुलना में लगभग 42 प्रतिशत कम बारिश हुई। सामान्य परिस्थितियों में जहां इस अवधि में 113 मिलीमीटर के आसपास वर्षा होती है, वहीं इस बार केवल 65.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। वर्षा की इस कमी ने कृषि, जल प्रबंधन और मौसमीय संतुलन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं। हालांकि अब मॉनसून की दोबारा सक्रियता से इस कमी की आंशिक भरपाई होने की उम्मीद जताई जा रही है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक असर
मध्य भारत के राज्य विशेष रूप से वर्षा की कमी से प्रभावित रहे हैं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सामान्य से लगभग 64 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जो देश में सबसे अधिक कमी वाले क्षेत्रों में शामिल है। इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों में भी सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है। दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी बारिश का स्तर अपेक्षाकृत कम रहा। अब जब मॉनसून इन क्षेत्रों में सक्रिय हो रहा है, तब मौसम विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आगामी सप्ताहों में वर्षा का स्तर बेहतर होगा और जल संकट की आशंकाएं कुछ हद तक कम हो सकेंगी।
उत्तर भारत में मौसम बदलने के संकेत
मौसम विभाग का अनुमान है कि जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के शुरुआती दिनों के बीच दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के बड़े हिस्से मॉनसून के प्रभाव में आ जाएंगे। इससे तापमान में गिरावट आएगी और भीषण गर्मी से राहत मिलेगी। उत्तर प्रदेश के लिए यह बदलाव विशेष महत्व रखता है क्योंकि यहां कृषि, पेयजल और जनजीवन तीनों पर मानसून का सीधा प्रभाव पड़ता है। आने वाले दिनों में बादलों की सक्रियता और वर्षा की बढ़ती संभावनाएं संकेत दे रही हैं कि प्रदेश में बरसात का असली मौसम अब शुरू होने वाला है।