मध्य प्रदेश में इस वर्ष मानसून अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। भारतीय मौसम विभाग के भोपाल केंद्र के अनुसार राज्य में अब तक सामान्य से लगभग तीन प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जो मानसून के सक्रिय दौर में चिंता का विषय मानी जा रही है। सामान्य परिस्थितियों में जुलाई का महीना प्रदेश में सर्वाधिक वर्षा लेकर आता है, लेकिन इस बार मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने से वर्षा का वितरण असंतुलित हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में प्रभावी वर्षा नहीं होती है तो कृषि गतिविधियों के साथ-साथ भूजल स्तर और जलाशयों पर भी इसका व्यापक प्रभाव दिखाई दे सकता है।
पूर्वी और पश्चिमी दोनों संभागों में वर्षा की कमी, कई जिलों पर सूखे का खतरा
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से लगभग 17 प्रतिशत तथा पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगभग 10 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। पिछले पांच दिनों से राज्य के अधिकांश हिस्सों में कहीं भी व्यापक या भारी वर्षा नहीं हुई है। जबलपुर, शहडोल, सागर और रीवा संभाग के साथ-साथ भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम तथा ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में भी वर्षा की कमी स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है। इन क्षेत्रों में खेतों की नमी तेजी से घट रही है और किसानों के बीच खरीफ फसलों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। यदि वर्षा की यह कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।
आज कई जिलों में हल्की वर्षा की संभावना, व्यापक राहत के आसार नहीं
भारतीय मौसम विभाग ने आज प्रदेश के अनेक जिलों में हल्की वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है। अनूपपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, अलीराजपुर, दतिया, धार, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, शिवपुरी तथा विदिशा जैसे जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना जताई गई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इन बौछारों से पूरे प्रदेश में वर्षा की कमी की भरपाई होना संभव नहीं है और व्यापक स्तर पर राहत मिलने के लिए मजबूत मानसूनी तंत्र की आवश्यकता होगी।
प्रदेश के कई हिस्सों में तेज वर्षा के भी संकेत, लेकिन वितरण रहेगा असमान
मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि प्रदेश के कुछ जिलों में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा हो सकती है। छतरपुर, दमोह, निवाड़ी, पांढुर्णा, आगर-मालवा, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर तथा उज्जैन में वर्षा की गतिविधियां अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक सक्रिय रहने का अनुमान है। इसके बावजूद मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षा का वितरण पूरे प्रदेश में समान नहीं रहेगा, इसलिए अनेक जिलों में वर्षा की कमी की स्थिति बनी रह सकती है।
कृषि और जल संसाधनों पर बढ़ सकता है असर, किसान कर रहे मानसून के सक्रिय होने का इंतजार
मानसून की कमजोर स्थिति का सबसे अधिक प्रभाव खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती वृद्धि पर पड़ सकता है। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है वहां खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे सोयाबीन, धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की स्थिति प्रभावित होने की आशंका है। जलाशयों, तालाबों और छोटे बांधों में भी अपेक्षित जलभराव नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले एक सप्ताह में अच्छी वर्षा नहीं होती है तो सिंचाई और पेयजल की चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में किसान और प्रशासन दोनों की नजर आगामी मौसम प्रणाली पर टिकी हुई है।
दो से तीन दिन बाद बन सकता है नया मौसम तंत्र, फिर तेज हो सकती है बारिश
भारतीय मौसम विभाग का अनुमान है कि वर्तमान में मानसून की सक्रियता कमजोर बनी रहेगी और अगले दो से तीन दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी वर्षा की संभावना कम है। इसके बाद बंगाल की खाड़ी अथवा अन्य अनुकूल क्षेत्रों में नया मौसम तंत्र विकसित होने की संभावना है, जिसके प्रभाव से मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है। यदि यह प्रणाली प्रभावी रूप से विकसित होती है तो मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जुलाई के शेष दिनों में मानसून की वापसी राज्य के वर्षा संतुलन को काफी हद तक सुधार सकती है।