भोपाल - कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन रद्द होने के मामले में अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। फॉर्म 26 विवाद को लेकर यह मामला अदालत तक पहुंच चुका है और फिलहाल इसकी सुनवाई भारत का सर्वोच्च न्यायालयमें चल रही है। मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए वह इस पर विस्तार से टिप्पणी नहीं करेंगी, लेकिन उन्होंने अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।
फॉर्म 26 को लेकर क्या है विवाद
पूरा विवाद नामांकन के दौरान भरे गए फॉर्म 26 से जुड़ा है। आरोप है कि इसमें कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां कथित रूप से छिपाई गईं या अधूरी दी गईं। इसी आधार पर उनका नामांकन रद्द किए जाने की बात सामने आई। नटराजन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने सभी आवश्यक जानकारी पहले ही चुनाव आयोग के समक्ष उपलब्ध कराई थी।
कोई जानकारी छिपाई नहीं गई - मीनाक्षी नटराजन
मीनाक्षी नटराजन ने अपनी सफाई में कहा कि फॉर्म 26 में केवल वही जानकारी दी जाती है जो निर्धारित कॉलम में मांगी जाती है। उनके अनुसार, इसमें निजी शिकायतों या साधारण कानूनी नोटिस को दर्ज करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें केवल एक कानूनी नोटिस मिला था, लेकिन किसी अदालत ने उस मामले में अभी तक संज्ञान नहीं लिया है। इसलिए इसे छिपाने का आरोप सही नहीं है।
ECI को पहले ही दी गई थी जानकारी
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस नोटिस से जुड़ी पूरी जानकारी पहले ही भारत निर्वाचन आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में दे दी थी। अब वही तथ्य वे सुप्रीम कोर्ट में भी प्रस्तुत करेंगी। नटराजन का कहना है कि पूरा विवाद इस बात पर निर्भर करता है कि फॉर्म 26 में किस प्रकार की जानकारी अनिवार्य थी और किसे घोषित करना जरूरी था। उनका तर्क है कि अगर किसी निजी शिकायत या नोटिस के लिए अलग कॉलम होता, तो वह उसे जरूर भरतीं।
फॉर्म 26 विवाद अब पूरी तरह कानूनी व्याख्या पर आधारित हो गया है। एक तरफ आयोग की प्रक्रिया और नामांकन नियम हैं, तो दूसरी तरफ उम्मीदवार की सफाई। अब इस मामले का अंतिम फैसला अदालत की व्याख्या पर निर्भर करेगा।