भोपाल. मध्य प्रदेश में कुछ दिनों की अपेक्षाकृत कम वर्षा के बाद मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में विकसित हुए नए निम्न दाब क्षेत्र और उससे जुड़े सक्रिय मानसूनी तंत्र के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां तेज होने लगी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रणाली उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रही है, जिसके प्रभाव से पूर्वी तथा मध्य मध्य प्रदेश में व्यापक वर्षा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सक्रिय मानसून द्रोणिका और निम्न दाब क्षेत्र के संयुक्त प्रभाव से वातावरण में पर्याप्त नमी पहुंच रही है। इससे अगले कुछ दिनों तक लगातार बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ वर्षा होने तथा कई स्थानों पर अत्यधिक वर्षा दर्ज किए जाने की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने प्रशासन और नागरिकों को लगातार मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।
अगले चार दिनों तक कई क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना
मौसम विभाग का अनुमान है कि प्रदेश में अगले चार दिनों तक वर्षा का सिलसिला जारी रहेगा। विशेष रूप से पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में कहीं-कहीं भारी से अत्यधिक भारी वर्षा हो सकती है। सागर, रीवा, जबलपुर तथा आसपास के क्षेत्रों में लगभग चार इंच तक वर्षा दर्ज होने की संभावना व्यक्त की गई है। यदि वर्षा का यह क्रम बना रहता है तो कई नदियों, तालाबों और बांधों के जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार हो रही वर्षा के कारण निचले इलाकों में जलभराव, छोटे नदी-नालों में अचानक जलस्तर बढ़ने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहेगी। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने तथा आवश्यकतानुसार राहत एवं बचाव व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इन जिलों में जारी किया गया भारी वर्षा का अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए प्रदेश के जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी सहित कुल 12 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। इसके अतिरिक्त भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, विदिशा, छिंदवाड़ा, सीहोर, सतना, सिवनी, श्योपुर, शिवपुरी, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, मंदसौर, मुरैना, मैहर, दतिया, देवास, दमोह, आलीराजपुर, आगर-मालवा, अशोकनगर, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, गुना, भिंड, नीमच, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, झाबुआ, बैतूल, उमरिया, पन्ना, पांढुर्णा, धार तथा हरदा जैसे अनेक जिलों में भी हल्की से मध्यम अथवा कहीं-कहीं तेज वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है।
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्षा की तीव्रता स्थान विशेष के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। कुछ क्षेत्रों में अल्प अवधि में अत्यधिक वर्षा दर्ज होने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर जलभराव और यातायात बाधित होने जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
कृषि और जल संसाधनों के लिए राहत, लेकिन सतर्कता भी जरूरी
लगातार सक्रिय हो रहा मानसून किसानों के लिए राहत लेकर आया है। खरीफ फसलों, विशेष रूप से धान, सोयाबीन, मक्का तथा दलहनी फसलों के लिए यह वर्षा लाभदायक मानी जा रही है। पर्याप्त वर्षा से खेतों में नमी बनी रहेगी और सिंचाई पर निर्भरता कम होगी। इसके साथ ही प्रदेश के प्रमुख जलाशयों, बांधों और पेयजल स्रोतों में भी जल उपलब्धता बढ़ने की संभावना है।
हालांकि कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। लंबे समय तक खेतों में पानी भरने से फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। इसलिए किसानों को स्थानीय कृषि विभाग और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार खेतों का प्रबंधन करने की सलाह दी गई है।
प्रशासन ने नागरिकों से बरतने को कहा विशेष एहतियात
संभावित भारी वर्षा को देखते हुए जिला प्रशासनों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन दलों को तैयार रखा गया है तथा नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। जिन क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही है वहां अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले मार्गों से दूर रहने तथा बिजली गिरने की आशंका के दौरान खुले स्थानों में न जाने की सलाह दी गई है।
प्रशासन ने यह भी कहा है कि किसी भी आपात स्थिति में नागरिक स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष से तत्काल संपर्क करें। विद्यालयों, ग्रामीण मार्गों तथा पुल-पुलियों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है ताकि आवश्यकता पड़ने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
मानसूनी प्रणाली अगले कुछ दिनों तक रहेगी प्रभावी
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दाब क्षेत्र और मानसून द्रोणिका की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में वर्षा की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। यदि यह प्रणाली अपेक्षित दिशा में आगे बढ़ती है, तो मध्य प्रदेश के अलावा आसपास के राज्यों में भी अच्छी वर्षा दर्ज की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त का दूसरा पखवाड़ा सामान्यतः मानसून के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दौरान सक्रिय मौसम प्रणालियां प्रदेश में औसत वर्षा को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। फिलहाल मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता के अनुसार समय-समय पर अद्यतन चेतावनियां जारी कर रहा है।