नई दिल्ली। सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का व्रत रखा जाता है। इस साल हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा और योग्य वर पाने की कामना से यह व्रत रखती हैं। पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल तृतीया तिथि का आरंभ 14 अगस्त की शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा और इसका समापन 15 अगस्त की शाम 5 बजकर 28 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त को रखा जाएगा।
सुहागिन महिलाएं क्यों रखती हैं हरियाली तीज का व्रत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज का व्रत माता पार्वती और भगवान शिव के मिलन से जुड़ा है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत करती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए हरियाली तीज का व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं विशेष रूप से श्रृंगार करती हैं और पूजा-अर्चना के साथ तीज के पारंपरिक उत्सव में हिस्सा लेती हैं।
हरियाली तीज पर हरे रंग का क्यों है खास महत्व?
हरियाली तीज के नाम में ही ‘हरियाली’ शामिल है। सावन में बारिश के कारण चारों तरफ हरियाली छा जाती है। इसी प्राकृतिक वातावरण से इस पर्व का हरे रंग से विशेष संबंध माना जाता है धार्मिक मान्यताओं में हरा रंग शुभता, समृद्धि, प्रकृति, उर्वरता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि हरियाली तीज के दिन महिलाएं हरे रंग की साड़ी या अन्य पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं। हरे रंग की चूड़ियां और मेहंदी भी इस पर्व के श्रृंगार का अहम हिस्सा होती हैं। सावन की हरियाली और महिलाओं के हरे परिधानों से पूरे वातावरण में उत्सव का रंग दिखाई देता है।
हरे रंग का वैज्ञानिक महत्व भी समझिए
हरे रंग को आंखों के लिए अपेक्षाकृत आरामदायक माना जाता है। सावन के मौसम में पेड़-पौधों और हरियाली से घिरा वातावरण भी मन को ताजगी और सुकून का अनुभव कराता है। इसी कारण हरियाली तीज में प्राकृतिक हरियाली और हरे रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। यह पर्व प्रकृति और उत्सव के सुंदर मेल को भी दर्शाता है।
हरियाली तीज पर झूला झूलने की परंपरा
हरियाली तीज की सबसे खास परंपराओं में झूला झूलना शामिल है। सावन में पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं और महिलाएं समूह में झूला झूलते हुए तीज के पारंपरिक गीत गाती हैं। कई क्षेत्रों में हरियाली तीज को सामूहिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। महिलाएं एक जगह एकत्र होती हैं, पारंपरिक गीत गाती हैं और झूला झूलकर त्योहार की खुशियां मनाती हैं।
शिव-पार्वती के मिलन से जुड़ा है पर्व
हरियाली तीज को माता पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।
इसी वजह से विवाहित महिलाएं इस दिन अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। वहीं अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए पूजा और व्रत करती हैं।
राधा-कृष्ण से भी जुड़ी है झूले की परंपरा
कई क्षेत्रों में सावन के झूले की परंपरा को राधा-कृष्ण से भी जोड़कर देखा जाता है। ब्रज और वृंदावन की परंपराओं में सावन के दौरान राधा-कृष्ण के झूला उत्सव का विशेष महत्व है। सावन के गीत, झूले और हरियाली इस पर्व को और भी खास बनाते हैं। झूला झूलने को मनोरंजन के साथ-साथ मानसिक प्रसन्नता और तनाव से राहत से भी जोड़ा जाता है।
हरियाली तीज 2026 पर क्या है खास?
इस बार हरियाली तीज 15 अगस्त को पड़ रही है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज का संयोग होने के कारण देश के कई हिस्सों में एक ही दिन दो अलग-अलग अवसरों का उत्सवी माहौल देखने को मिलेगा।
हरियाली तीज का पर्व प्रकृति, सुहाग, प्रेम, आस्था और पारंपरिक संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं हरे वस्त्र और चूड़ियां पहनकर पूजा करती हैं, मेहंदी लगाती हैं और झूला झूलकर सावन के उत्सव का आनंद लेती हैं।