शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश, बाढ़, भूस्खलन और सड़क हादसों ने भारी तबाही मचाई है। प्रदेश में 30 जून से 13 अगस्त तक प्राकृतिक आपदाओं और सड़क हादसों में 177 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं सार्वजनिक और निजी संपत्ति को 955.52 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में 136 सड़कें बाधित हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।
14 से 19 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 14 से 19 अगस्त तक अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 14, 17 और 18 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 14 अगस्त को लाहुल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और ऊना को छोड़कर प्रदेश के अन्य जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है।
बिजली गिरने से 150 भेड़-बकरियों की मौत
किन्नौर जिले की निचार तहसील की रूपी पंचायत के गुरगुरी कंडे में बुधवार देर रात बिजली गिरने की घटना सामने आई। बिजली गिरने से दलीप सिंह की करीब 150 भेड़-बकरियों की मौत हो गई। इस घटना से स्थानीय पशुपालकों में भी चिंता बढ़ गई है। खराब मौसम के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली गिरने और तेज बारिश से पशुधन को भी खतरा बना हुआ है।
धर्मशाला में घर और दुकानों में घुसा बारिश का पानी
धर्मशाला में भी भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति देखने को मिली। शहर के वार्ड नंबर पांच के खजांची मोहल्ले में बारिश का पानी एक मकान और चार दुकानों में घुस गया। इससे दुकानों में रखा सामान खराब होने की जानकारी सामने आई है।
वहीं धर्मशाला के खड़ा डंडा मार्ग पर तेज बहाव के कारण एक बाइक कुछ दूरी तक पानी में बह गई।
शिमला में पहाड़ी से गिरे पत्थर, वाहन क्षतिग्रस्त
शिमला में भी बारिश के बीच भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ढली सब्जी मंडी के सामने गुरुवार को पहाड़ी से पत्थर गिरने से एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण सड़क किनारे चट्टानों और मिट्टी के खिसकने का खतरा बना हुआ है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है।
शिमला के शकराला-मल्याणा में भू-धंसाव का खतरा
शिमला ग्रामीण क्षेत्र के शकराला-मल्याणा में भू-धंसाव की आशंका ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रभावित इलाके में 100 से ज्यादा भवन हैं और इनमें से कई मकानों में बार-बार दरारें दिखाई दे रही हैं। मानसून के दौरान जमीन में हलचल बढ़ने से लोगों को मकानों के क्षतिग्रस्त होने या गिरने का डर सता रहा है। स्थानीय स्तर पर पिछले कई वर्षों से जमीन खिसकने और धंसने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
प्रशासन ने किया मौके का निरीक्षण
एसडीएम शिमला ग्रामीण मनजीत शर्मा के अनुसार प्रशासन की टीम ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया है। प्रारंभिक जांच में फिलहाल तीन मकानों में हल्की दरारें पाई गई हैं। प्रशासन का कहना है कि अभी बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है और विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को भेजी जाएगी।
भू-धंसाव के कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन होगा
शकराला-मल्याणा क्षेत्र में जमीन खिसकने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से वैज्ञानिक अध्ययन करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञ क्षेत्र की जमीन की स्थिति, जल निकासी व्यवस्था और भौगोलिक परिस्थितियों का अध्ययन करेंगे। अध्ययन रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि भू-धंसाव के पीछे प्राकृतिक कारण हैं या मानवीय गतिविधियों की भी कोई भूमिका है।
हिमाचल में अभी टला नहीं बारिश का खतरा
हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान पहले ही बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हो चुका है। अब मौसम विभाग की ओर से आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी के बाद संवेदनशील इलाकों में खतरा बरकरार है। 177 से ज्यादा मौतें, 955 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान और 136 सड़कों के बाधित होने के बीच प्रशासन के सामने राहत, बचाव और यातायात व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।