गुरुग्राम - देश आज विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मना रहा है। इस मौके पर 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों को याद किया जा रहा है। भाजपा की ओर से इस अवसर पर कांग्रेस की तत्कालीन नीतियों और विभाजन की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
नितिन नवीन ने विभाजन को बताया दर्दनाक अध्याय
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने स्मृति दिवस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के विभाजन की त्रासदी को देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि आजादी मिलने से पहले ही देश के कई लोगों को यह अंदेशा होने लगा था कि स्वतंत्रता के साथ विभाजन का दर्द भी सामने आ सकता है।
लाहौर प्रस्ताव का किया जिक्र
नितिन नवीन ने 1940 के लाहौर प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय द्विराष्ट्र सिद्धांत की चर्चा सामने आई थी। उनके मुताबिक, इसी दौर में लोगों को यह आशंका होने लगी थी कि देश की आजादी के साथ विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े लोगों ने जिस आजादी का सपना देखा था, उसका अंत देश के बंटवारे की त्रासदी के रूप में हुआ।
सत्ता और आम लोगों के दर्द का मुद्दा
भाजपा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि जिन लोगों ने सत्ता हासिल करने का सपना देखा, उन्हें सत्ता मिल गई, लेकिन आम लोगों को विभाजन का भारी दंश झेलना पड़ा। उनके अनुसार, लाखों लोगों को अपना घर-परिवार छोड़ना पड़ा और बड़ी संख्या में लोगों ने अपनों को खोया। नितिन नवीन ने आरोप लगाया कि सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया में कुछ नेताओं ने अपने राजनीतिक भविष्य को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा करोड़ों भारतीयों को भुगतना पड़ा।
विस्थापन और हिंसा की याद
विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर आबादी का विस्थापन हुआ था। भारत और पाकिस्तान के गठन के साथ लाखों परिवारों को अपना घर छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा। हिंसा और असुरक्षा के कारण लोगों ने लंबी दूरी तय कर नए स्थानों पर शरण ली। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य इसी मानवीय त्रासदी को याद करना और उन परिवारों के संघर्ष को सामने लाना है, जिन्होंने उस दौर में अपने परिजनों, संपत्ति और पुश्तैनी घरों को खो दिया।
भाजपा लगातार कांग्रेस को घेर रही
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर भाजपा नेता कांग्रेस की तत्कालीन भूमिका पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि देश के विभाजन के पीछे की परिस्थितियों और उस समय लिए गए राजनीतिक फैसलों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। वहीं, भाजपा के इस राजनीतिक रुख के बीच विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियों को लेकर देश में बहस भी तेज होती रही है। स्मृति दिवस के जरिए सरकार और भाजपा जहां विभाजन के पीड़ितों को याद कर रही हैं, वहीं विपक्ष की तत्कालीन भूमिका को लेकर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल रहे हैं।