MP UCC Draft Ready: मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में मोहन सरकार ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। राज्य सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने यूसीसी का ड्राफ्ट लगभग तैयार कर लिया है और अब अंतिम चरण में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मंथन चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार आदिवासी समुदायों की तरह घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और घुमक्कड़ जातियों को भी यूसीसी के दायरे से बाहर रखने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो यह मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू करने से पहले सबसे बड़ा सामाजिक और कानूनी फैसला माना जाएगा। सरकार की मंशा है कि यूसीसी लागू करते समय उन समुदायों की पारंपरिक जीवनशैली, सामाजिक परिस्थितियों और संवैधानिक संरक्षण का भी पूरा ध्यान रखा जाए, जिनकी जीवनशैली आज भी सामान्य आबादी से अलग है।
UCC का ड्राफ्ट लगभग तैयार, अंतिम चर्चा जारी
सूत्रों के मुताबिक, यूसीसी का मसौदा तैयार हो चुका है। अब इसमें शामिल कुछ संवेदनशील प्रावधानों और छूट से जुड़े मुद्दों पर अंतिम स्तर की चर्चा की जा रही है। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर विधेयक का अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा कानून बनाना है जो सभी नागरिकों के लिए समान हो, लेकिन संविधान द्वारा संरक्षित विशेष समुदायों के अधिकारों का भी सम्मान करे।
किन समुदायों को मिल सकती है UCC से छूट?
जानकारों के अनुसार सरकार निम्न समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने पर विचार कर रही है—
घुमंतू जातियां
अर्ध-घुमंतू समुदाय
घुमक्कड़ (Nomadic) समुदाय
पहले से घोषित आदिवासी समुदाय
इन समुदायों की आबादी प्रदेश में अपेक्षाकृत कम है और इनकी सामाजिक परिस्थितियां सामान्य नागरिकों से अलग मानी जाती हैं।
आखिर क्यों मिल सकती है इन समुदायों को राहत?
सामाजिक मामलों के विशेषज्ञ अनिल गर्ग के अनुसार, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों का स्थायी निवास नहीं होता। आज भी ये समुदाय आजीविका के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर लगातार आवाजाही करते रहते हैं। इसी कारण-
इनके पास स्थायी पता नहीं होता।
कई लोगों के आवश्यक दस्तावेज अधूरे हैं।
बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा और सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।
कई परिवारों को आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ भी नहीं मिल पाता।
इन्हीं सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार इनके लिए विशेष व्यवस्था पर विचार कर रही है।
आदिवासी समुदाय को पहले ही मिल चुकी है छूट की घोषणा
मोहन सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि आदिवासी समुदायों को यूसीसी से बाहर रखा जाएगा। मध्यप्रदेश देश के प्रमुख आदिवासी राज्यों में शामिल है और यहां कई जनजातियों की अपनी पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था एवं रीति-रिवाज हैं, जिन्हें संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। सरकार इन्हीं परंपराओं को ध्यान में रखते हुए आदिवासी समाज को यूसीसी से अलग रखने की तैयारी कर रही है।
क्या मानसून सत्र में पेश होगा UCC विधेयक?
हालांकि सरकार यूसीसी लागू करने की तैयारी कर रही है, लेकिन फिलहाल इसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना कम मानी जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि राज्य सरकार ने यूसीसी ड्राफ्ट तैयार कर रही उच्च स्तरीय समिति का कार्यकाल 26 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया है, जबकि विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक प्रस्तावित है। ऐसे में समिति की अंतिम रिपोर्ट सत्र समाप्त होने के बाद मिलने की संभावना है, जिसके कारण विधेयक का पेश होना फिलहाल मुश्किल माना जा रहा है।
सरकार ने क्यों बढ़ाया समिति का कार्यकाल?
30 जून को विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सदस्य सचिव के अनुरोध और ड्राफ्ट तैयार करने की प्रगति को देखते हुए समिति का कार्यकाल बढ़ाया गया है। सरकार चाहती है कि किसी भी कानूनी विवाद से बचने के लिए सभी पहलुओं की गहन समीक्षा के बाद ही अंतिम मसौदा तैयार किया जाए।
गुजरात मॉडल पर तैयार हुआ है ड्राफ्ट
सूत्रों के अनुसार, मध्यप्रदेश के यूसीसी ड्राफ्ट का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा गुजरात मॉडल से प्रेरित है। प्रस्तावित कानून में इन विषयों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रावधान रखा गया है-
विवाह
तलाक
उत्तराधिकार
वसीयत
भरण-पोषण
बच्चों की अभिरक्षा
लिव-इन रिलेशनशिप
सरकार का उद्देश्य सभी समुदायों के लिए पारिवारिक कानूनों में समानता सुनिश्चित करना है।
UCC लागू होने पर क्या बदलेगा?
यदि प्रस्तावित स्वरूप में यूसीसी लागू होता है तो अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर अधिकांश नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी। हालांकि आदिवासी और कुछ विशेष समुदायों को दी जाने वाली संभावित छूट के कारण कानून का स्वरूप अंतिम ड्राफ्ट आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगा। अब सभी की नजर राज्य सरकार और उच्च स्तरीय समिति की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे तय होगा कि मध्यप्रदेश में यूसीसी किस स्वरूप में लागू किया जाएगा।