Chirag Paswan UP Election: बिहार की राजनीति के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) अपनी ताकत बढ़ाने की तैयारी में है। केंद्रीय मंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेगी। हालांकि कितनी सीटों पर चुनाव लड़ा जाएगा और गठबंधन का स्वरूप क्या होगा, इस पर अंतिम फैसला राज्य इकाई की रिपोर्ट के बाद केंद्रीय संसदीय बोर्ड करेगा। चिराग पासवान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूपी में सभी राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट चुके हैं। ऐसे में उनके इस ऐलान को राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
लखनऊ से देंगे बड़ा राजनीतिक संदेश
चिराग पासवान ने घोषणा की कि लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की जयंती इस वर्ष लखनऊ में बड़े स्तर पर मनाई जाएगी। पार्टी इसे केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार अभियान की औपचारिक शुरुआत मान रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजधानी लखनऊ में इस कार्यक्रम का आयोजन कर पार्टी दलित, पिछड़े और युवा वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास करेगी।
यूपी में संगठन मजबूत करने पर फोकस
चिराग पासवान ने कहा कि पार्टी अब केवल बिहार तक सीमित नहीं रहना चाहती। देशभर में संगठन विस्तार की रणनीति पर काम किया जा रहा है और उत्तर प्रदेश इसमें सबसे अहम राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि जिला और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया जाएगा, ताकि चुनाव से पहले पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज करा सके।
यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने का किया ऐलान
चिराग पासवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जरूर लड़ेगी। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि-
पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी,
गठबंधन होगा या नहीं,
सीट शेयरिंग का फार्मूला क्या रहेगा,
इन सभी मुद्दों पर अंतिम निर्णय उत्तर प्रदेश इकाई की सिफारिश के बाद पार्टी का केंद्रीय संसदीय बोर्ड करेगा। यानी फिलहाल पार्टी ने चुनाव लड़ने का फैसला तो कर लिया है, लेकिन रणनीति पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
क्या NDA के साथ ही रहेगा चिराग का सफर?
चिराग पासवान फिलहाल केंद्र में एनडीए सरकार का हिस्सा हैं और केंद्रीय मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश चुनाव में उनकी पार्टी एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी या अलग रणनीति अपनाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीट शेयरिंग को लेकर आगे भाजपा और अन्य सहयोगी दलों के साथ बातचीत अहम भूमिका निभाएगी।
रामविलास पासवान की जयंती पर होगा शक्ति प्रदर्शन
चिराग पासवान के इस ऐलान का एक बड़ा कारण रामविलास पासवान की जयंती भी है। पार्टी इस मौके पर लखनऊ में बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एकजुट करेगी। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश संगठन के विस्तार, नए पदाधिकारियों की घोषणा और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश दिए जा सकते हैं।
कौन थे रामविलास पासवान?
रामविलास पासवान देश के प्रमुख दलित नेताओं में गिने जाते थे। उनका जन्म 5 जुलाई 1946 को बिहार में हुआ था। उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना की और कई बार सांसद तथा केंद्रीय मंत्री रहे। सामाजिक न्याय, दलित अधिकार और पिछड़े वर्गों के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के कारण उनकी अलग पहचान रही। उनके निधन के बाद चिराग पासवान ने पार्टी की कमान संभाली और अब संगठन के राष्ट्रीय विस्तार पर जोर दे रहे हैं।
यूपी की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
चिराग पासवान की एंट्री से उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है। यदि पार्टी राज्य में प्रभावी संगठन खड़ा करने में सफल रहती है तो दलित और पिछड़े वर्ग के वोट बैंक पर इसका असर पड़ सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि लोक जनशक्ति पार्टी यूपी में अकेले चुनाव लड़ती है या एनडीए के साथ सीटों के बंटवारे पर सहमति बनाती है।