भारत छोड़ो आंदोलन की स्मृति में देशभर में स्वतंत्रता संग्राम के उस ऐतिहासिक अध्याय को याद किया जा रहा है, जिसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आजादी की लड़ाई को निर्णायक मोड़ दिया था। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव था। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की नींव को चुनौती दी और देशवासियों में आजादी हासिल करने के लिए नया जोश पैदा किया।
गांधी जी के ‘करो या मरो’ के आह्वान ने जगाई नई ऊर्जा
भारत छोड़ो आंदोलन का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के आह्वान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि गांधी जी के इस संदेश ने देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को एकजुट किया और स्वतंत्रता की लड़ाई को व्यापक जनभागीदारी मिली।
1942 में शुरू हुआ यह आंदोलन अंग्रेजी शासन के खिलाफ एक बड़े जनआंदोलन के रूप में सामने आया। आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश शासन को भारत से समाप्त करने और देश को स्वतंत्र कराने की मांग को निर्णायक रूप देना था।
आजादी की लड़ाई में जनभागीदारी बनी बड़ी ताकत
भारत छोड़ो आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका व्यापक जनसमर्थन था। आंदोलन का प्रभाव शहरों से लेकर गांवों तक दिखाई दिया। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, युवाओं, किसानों, महिलाओं और आम नागरिकों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाई।ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कीं और कई नेताओं को जेल में डाल दिया। इसके बावजूद आंदोलन की भावना को पूरी तरह दबाया नहीं जा सका। देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों ने अपने स्तर पर आंदोलन को आगे बढ़ाया।
स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को किया याद
कमलनाथ ने अपने संदेश में उन स्वतंत्रता सेनानियों को भी नमन किया जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम केवल कुछ नेताओं का संघर्ष नहीं था, बल्कि करोड़ों भारतीयों के त्याग, संघर्ष और साहस का परिणाम था।
आजादी की लड़ाई में अनेक ऐसे लोगों ने योगदान दिया, जिनका नाम इतिहास के पन्नों में भले ही प्रमुखता से दर्ज न हो, लेकिन उनका संघर्ष स्वतंत्र भारत की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण रहा।
1942 का आंदोलन बना निर्णायक पड़ाव
भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत अगस्त 1942 में हुई थी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मुंबई में हुई बैठक में ब्रिटिश शासन के खिलाफ निर्णायक आंदोलन का आह्वान किया था।
महात्मा गांधी ने इस दौरान देशवासियों से अंग्रेजी शासन के खिलाफ अंतिम और निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार होने का संदेश दिया। उनका ‘करो या मरो’ का आह्वान आंदोलन का प्रमुख संदेश बन गया।ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन के तुरंत बाद कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन की गतिविधियां देश के विभिन्न हिस्सों में जारी रहीं।
भारत छोड़ो आंदोलन की स्मृति में देश स्वतंत्रता संग्राम के उन वीरों को याद करता है जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया। 1942 का यह आंदोलन भारतीय इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसने आजादी की मांग को एक व्यापक और निर्णायक जनआंदोलन में बदल दिया था।