दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके समर्थक विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर 7 मार्च को सुनवाई होगी। यूबीटी गुट की ओर से शीघ्र सुनवाई करने की गुहार लगाई थी जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने मामले को 7 मार्च को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
विधानसभा अध्यक्ष ने 10 जनवरी को सभी अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया और शिंदे के समूह को असली शिवसेना घोषित कर दिया था। यूबीटी समूह की ओर सुनील प्रभु ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। याचिका में तर्क दिया गया कि विधानसभा अध्यक्ष का आदेश गैरकानूनी और विकृत थे।
याचिका में यह भी कहा गया है कि अधिकांश विधायकों को राजनीतिक दल की इच्छा का प्रतिनिधित्व करने वाला मानकर विधानसभा अध्यक्ष ने वास्तव में विधायक दल को राजनीतिक दल के बराबर मान लिया है, जो कि सुभाष देसाई के मामले में शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित कानून के दायरे में है।
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने मामले को 7 मार्च को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
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