तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने शुक्रवार (15 दिसंबर) को कहा कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोवा हवाई अड्डे पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक कांस्टेबल ने एक तमिल महिला को इसलिए परेशान किया क्योंकि उसने पुलिस अधिकारी को बताया था कि वह हिंदी भाषा नहीं जानती है।
हिंदी भाषा नहीं आने पर महिला को धमकाया
इस कथित घटना की कड़ी निंदा करते हुए स्टालिन ने कहा कि जब सीआईएसएफ के एक कर्मी ने महिला से हिंदी में बात की तो उसने कहा कि वह हिंदी भाषा नहीं जानती है और उस महिला को सिर्फ इस बात पर धमकाया गया।
‘तमिलनाडु भारत में है, सबको हिंदी आनी चाहिए’
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष स्टालिन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तमिल में किए एक पोस्ट में कहा कि सीआईएसएफ कर्मी ने यह कहते हुए भाषण दिया कि तमिलनाडु भारत में है और भारत में सभी लोगों को हिंदी आनी चाहिए और यह बहुत निंदनीय है।
सभी भाषाओं का होना चाहिए सम्मान- स्टालिन
मुख्यमंत्री ने पूछा कि सीआईएसएफ कर्मी को यह बात कौन बताएगा कि हिंदी संविधान में केवल एक आधिकारिक भाषा के तौर पर दर्ज है न कि राष्ट्रीय भाषा के रूप में। उन्होंने कहा कि संघीय व्यवस्था वाला भारत विभिन्न भाषाएं बोलने वाले लोगों की धरती है। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डों पर सीआईएसएफ कर्मियों को सभी भाषाओं को सम्मान देना चाहिए और संघवाद को मजबूत करना चाहिए। सीआईएसएफ इस देश के 67 नागरिक हवाई अड्डों की सुरक्षा करती है।
Read More: बीजेपी ने प्रियांक खड़गे पर साधा निशाना, बोले - सावरकर की तस्वीर हटाई गई तो नेहरू की भी तस्वीर हटा दी जाएगी
Comments (0)