तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रतिनिधिमंडल ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव' की संभावना तलाशने के लिए गठित समिति से मंगलवार को कहा कि यह भारत में “तानाशाही” लाने का एक “गुप्त एजेंडा” है। टीएमसी के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय और कल्याण बनर्जी पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में शामिल हुए। इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बैठक में शामिल होने वाली थीं, लेकिन उन्होंने राज्य के बजट संबंधी कार्यों के चलते अंतिम समय में दिल्ली का दौरा रद्द कर दिया।
तानाशाही सरकार बनाने का एक गुप्त एजेंडा
कल्याण बनर्जी ने बैठक के बाद मीडिया से कहा कि उन्होंने ममता बनर्जी के लिखे एक पत्र का जिक्र करते हुए ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव' के विचार का विरोध किया। उन्होंने कहा, "हम पूर्व राष्ट्रपति की अध्यक्षता वाली समिति के साथ हुई बैठक में शामिल हुए। हमने अपनी नेता ममता बनर्जी के लिखे पत्र का जिक्र किया। हमने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि हम 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के विचार का विरोध कर रहे हैं। यह भविष्य में तानाशाही सरकार बनाने का एक गुप्त एजेंडा है।”
जनता की शक्ति को कम नहीं किया जा सकता
कल्याण बनर्जी ने कहा, “पहले पूरे भारत में व्यावहारिक रूप से दो राष्ट्रीय राजनीतिक दल थे। अब अनेक क्षेत्रीय दल हैं। संविधान स्वयं कहता है कि जहां तक राज्य विधायिका का सवाल है, यह जनता की इच्छा है कि वह पांच साल के लिए अपनी सरकार चुने। इसी तरह लोग पांच साल के लिए केंद्र सरकार चुनेंगे। ये दो प्रावधान संविधान की मूल संरचना हैं।” उन्होंने कहा, “इन संवैधानिक प्रावधानों में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और 'एक राष्ट्र एक चुनाव' की अवधारणा पेश कर जनता की शक्ति को कम नहीं किया जा सकता।”
विचार वास्तव में देश के संघीय ढांचे में हस्तक्षेप
टीएमसी के नेता ने कहा, "मान लीजिए कि कोई राज्य सरकार गिर जाती है। ऐसा अब हर जगह हो रहा है। उस स्थिति में, क्या वह राज्य सरकार बरकरार रहेगी या शेष अवधि के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा? उस स्थिति में लोगों की पसंद से समझौता किया जाएगा... यह विचार वास्तव में देश के संघीय ढांचे में ही हस्तक्षेप है।" उन्होंने कहा, "पिछले कुछ वर्षों से विपक्षी दल कह रहे हैं कि केंद्र सरकार देश के संघीय ढांचे में हस्तक्षेप कर रही है। इसलिए, हम इस विचार का विरोध कर रहे हैं।" टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने पिछले महीने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को लेकर उच्चस्तरीय समिति को पत्र लिखकर कहा था कि वह इस अवधारणा से सहमत नहीं हैं।
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