बाबा साहेब अम्बेडकर संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से एक सामंजस्यपूर्ण भारतीय राष्ट्र की स्थापना करना चाहते थे। उन्हें अहसास था कि, यदि समाज के अंतर्निहित विरोधाभासों से प्रभावी ढंग से नहीं निपटा गया तो संविधान के उच्च आदर्श अधूरे रह जाएंगे। संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के प्रतीक बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की शुक्रवार 6 दिसंबर को पुण्यतिथि है। इसी दिन उनकी याद में महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
इन नेताओं ने दी बाबा साहेब की पुण्यतिथि पर अर्पित की श्रद्धांजलि
इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा सहित कई दिग्गज नेताओं ने उनको याद किया और श्रद्धांजलि दी। वहीं उत्तराखंड के मुख्यमत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बाबा साहेब अम्बेडकर को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है।
सीएम धामी ने बाबा साहेब की पुण्यतिथि पर अर्पित की श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री आवास में उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि, भारतीय संविधान के शिल्पकार, महान समाज सुधारक, भारत रत्न से अलंकृत बाबा साहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर का संपूर्ण जीवन संघर्ष, समानता और सामाजिक न्याय की अद्वितीय मिसाल है। हमें उनके आदर्शों पर चलकर एक समतामूलक समाज के निर्माण का संकल्प लेना होगा।
बाबा साहेब को भारतीय संविधान का जनक माना जाता है
आपको बता दें कि, डॉ अंबेडकर एक समाज सुधारक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, लेखक, बहुभाषाविद, मुखर वक्ता, विद्वान और धर्मों के विचारक थे। उनका जन्म वर्ष 1891 में महू, मध्य प्रांत (अब मध्य प्रदेश) में हुआ था। वह संविधान निर्माण की मसौदा समिति के अध्यक्ष थे। उन्हें ‘भारतीय संविधान का जनक’ माना जाता है और वह भारत के पहले कानून मंत्री थे, 6 दिसंबर, 1956 को उनका निधन हो गया था। चैत्य भूमि मुंबई में स्थित भीमराव अंबेडकर का स्मारक है।
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