ईंटानगर: चीन भारत के खिलाफ अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। बीजिंग ने अरुणाचल प्रदेश (China On Arunachal) पर अपने दावे पर फिर से जोर देने के मकसद से भारत के इस राज्य के लिए "चीनी, तिब्बती और पिनयिन" अक्षरों में नामों की तीसरी सूची जारी की है।
11 जगहों के जारी किए नाम
चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने रविवार (1अप्रैल) को अरुणाचल प्रदेश के लिए 11 जगहों के मानकीकृत (Standardised) नाम जारी किए, जिसे वह स्टेट काउंसिल, चीन की कैबिनेट की जारी भौगोलिक नामों पर नियमों के अनुसार 'तिब्बत का दक्षिणी भाग जंगनान' बताता है।
चीनी सरकार (China On Arunachal) के संचालित 'ग्लोबल टाइम्स' ने सोमवार (3 अप्रैल) को अपनी एक खबर में कहा कि मंत्रालय ने रविवार को 11 जगहों के आधिकारिक नाम जारी किए। इनमें दो भूमि क्षेत्रों, दो आवासीय क्षेत्रों, पांच पर्वत चोटियों और दो नदियों सहित सटीक निर्देशांक भी दिए गए हैं। इसके अलावा, स्थानों के नाम और उनके अधीनस्थ प्रशासनिक जिलों की श्रेणी सूचीबद्ध की गई है।
भारत ने किया खारिज
अरुणाचल प्रदेश में कुछ जगहों के नाम बदलने के चीनी कदम को भारत पहले भी खारिज कर चुका है। भारत यह कहता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश "सदैव" भारत का अभिन्न अंग रहा है और "हमेशा" रहेगा और 'गढ़े गए' नामों से यह तथ्य नहीं बदलता।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने दिसंबर 2021 में कहा था, 'यह पहली बार नहीं है, जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश में इस तरह से जगहों के नाम बदलने की कोशिश की है।' उन्होंने कहा था, 'अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है, और सदा रहेगा। अरुणाचल प्रदेश में स्थानों को गढ़े गए नाम देने से यह तथ्य नहीं बदल जाता।'
चीन ने बताया वैध कदम
'ग्लोबल टाइम्स' चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेली समूह के प्रकाशनों का हिस्सा है। इसने चीनी विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि नामों की घोषणा एक वैध कदम है और भौगोलिक नामों को मानकीकृत करना चीन का संप्रभु अधिकार है।
तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा की अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के बाद 2017 में चीन ने नामों की पहली सूची की घोषणा की थी। चीन ने उनकी यात्रा की काफी आलोचना की थी। दलाई लामा अरुणाचल प्रदेश के तवांग के रास्ते तिब्बत से भाग आए थे और उन्होंने 1950 में तिब्बत पर चीन के सैन्य नियंत्रण के बाद 1959 में भारत में शरण ली थी।
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