नई दिल्ली, अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 119वें एपिसोड को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की सराहना करते हुए कहा कि इसने अंतरिक्ष में शतक पूरा कर लिया है। पिछले महीने देश ने इसरो का 100वां रॉकेट लॉन्च होते देखा। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे कम से कम एक दिन के लिए वैज्ञानिक बनें तथा विज्ञान से संबंधित केंद्रों का दौरा करें।
प्रधानमंत्री ने इसरो की सराहना की
पीएम मोदी ने कहा, "इन दिनों चैंपियंस ट्रॉफी चल रही है और हर किसी के लिए क्रिकेट का माहौल है। क्रिकेट में शतक का रोमांच हम सभी जानते हैं। लेकिन आज मैं क्रिकेट की बात नहीं करने जा रहा हूं, बल्कि मैं अंतरिक्ष में भारत द्वारा लगाए गए अद्भुत शतक की बात करूंगा। पिछले महीने देश इसरो के 100वें रॉकेट लॉन्च का गवाह बना। यह सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह अंतरिक्ष विज्ञान में नित नई ऊंचाइयों को छूने के हमारे संकल्प को दर्शाता है। हमारी अंतरिक्ष यात्रा बहुत ही सामान्य तरीके से शुरू हुई। हर कदम पर चुनौतियां थीं, लेकिन हमारे वैज्ञानिक उन पर विजय प्राप्त करते हुए आगे बढ़ते रहे।"
अंतरिक्ष क्षेत्र में महिला शक्ति की भागीदारी बढ़ रही
प्रधानमंत्री ने कहा, "अंतरिक्ष क्षेत्र में महिला शक्ति की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। मुझे यह देखकर बहुत खुशी होती है कि आज अंतरिक्ष क्षेत्र युवाओं का पसंदीदा बन गया है। हमारे युवा जो अपने जीवन में कुछ रोमांचक और रोमांचक करना चाहते हैं, उनके लिए अंतरिक्ष क्षेत्र एक बेहतरीन विकल्प बन रहा है।" राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2025, जो 28 फरवरी को मनाया जाएगा। इस बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विज्ञान में युवाओं की रुचि और जुनून बहुत मायने रखता है और इसके लिए एक विचार प्रस्तुत किया - 'एक दिन वैज्ञानिक के रूप में'।
ज्ञान के लिए एक दिन समर्पित करें- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, "आप एक दिन वैज्ञानिक के तौर पर बिताने की कोशिश करें। आपको उस दिन रिसर्च लैब, प्लेनेटेरियम या अंतरिक्ष केंद्र जैसी जगहों पर जाना चाहिए। इससे विज्ञान के बारे में आपकी जिज्ञासा बढ़ेगी। अंतरिक्ष औरविज्ञान की तरह भारत एक और क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।
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