25 दिसंबर का दिन दुनियाभर में खास महत्व रखता है। इस दिन विश्व के कई देश क्रिसमस का पर्व धूमधाम से मनाते हैं। भारत के इतिहास में यह तारीख न केवल क्रिसमस डे के रूप में बल्कि सुशासन दिवस के रूप में भी दर्ज है। हर साल भारतीय 25 दिसंबर को सुशासन दिवस के रूप में मनाते हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
सुशासन दिवस भारत के तीन बार प्रधानमंत्री रहे स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ा हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज 100वीं जयंती है।अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। वाजपेयी जी अपने छात्र जीवन के दौरान पहली बार राजनीति में तब आये जब उन्होंने वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। वह राजनीति विज्ञान और विधि के छात्र थे और कॉलेज के दिनों में ही उनकी रुचि विदेशी मामलों के प्रति बढ़ी। वाजपेयी जी ने अपना करियर पत्रकार के रूप में शुरू किया था और 1951 में भारतीय जन संघ में शामिल होने के बाद उन्होंने पत्रकारिता छोड़ दी। आज की भारतीय जनता पार्टी को पहले भारती जन संघ के नाम से जाना जाता था।
तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे हैं। सबसे पहले 1996 में 13 दिनों के लिए वह प्रधानमंत्री बने थे। बहुमत साबित नहीं कर पाने की वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।
दूसरी बार वे 1998 में प्रधानमंत्री बने। सहयोगी पार्टियों के समर्थन वापस लेने की वजह से 13 महीने बाद 1999 में फिर आम चुनाव हुए।
13 अक्टूबर 1999 को वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। इस बार उन्होंने 2004 तक अपना कार्यकाल पूरा किया।
राजनीति में योगदान और नेतृत्व
अटल बिहारी वाजपेयी एक आदर्श राजनेता थे। वे पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने 26 राजनीतिक दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई। वे तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने।
सुशासन दिवस का महत्व
अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर हर साल 25 दिसंबर को भारत में सुशासन दिवस मनाया जाता है। 2015 में, अटल बिहारी वाजपेयी को भारत
रत्न से सम्मानित किया गया। इसके बाद, मोदी सरकार ने वाजपेयी जी की जयंती को सुशासन दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की।
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