अमरावती: आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल आपराधिक मामलों के लंबित होने के आधार पर किसी व्यक्ति का पासपोर्ट आवेदन खारिज या लंबित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने पासपोर्ट अधिकारियों की ऐसी कार्रवाई को अवैध और अनुचित करार दिया।
न्यायमूर्ति ने क्या कहा
न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति बट्टू देवानंद ने कई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कहा कि पासपोर्ट जारी करने, नवीनीकरण या पुनः जारी करने से इनकार करना सिर्फ इस आधार पर कि आवेदक के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है, कानून के दायरे में सही नहीं है।
मामले का मुख्य मुद्दा
अदालत के सामने यह सवाल था कि क्या पासपोर्ट प्राधिकरण केवल लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर आवेदन खारिज कर सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा पहले ही विभिन्न अदालतों द्वारा तय किया जा चुका है और इस पर अब कोई अस्पष्टता नहीं है।
संवैधानिक अधिकार पर जोर
अदालत ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार Article 21 of the Constitution of India के तहत एक मौलिक अधिकार है। इसे केवल विधिसम्मत, न्यायसंगत और तर्कसंगत प्रक्रिया के तहत ही सीमित किया जा सकता है। इस संदर्भ में अदालत ने मेनका गांधी बनाम भारत संघ जैसे महत्वपूर्ण फैसलों का भी उल्लेख किया।
अदालत के निर्देश
हाईकोर्ट ने पासपोर्ट अधिकारियों के आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि आवेदनों पर कानून के अनुसार पुनर्विचार किया जाए। साथ ही, याचिकाकर्ताओं के लिए कुछ शर्तें भी तय की गईं—
- आवेदक को एक शपथपत्र देना होगा कि वह बिना अदालत की अनुमति के विदेश नहीं जाएगा।
- संबंधित ट्रायल कोर्ट इस शपथपत्र की प्रमाणित प्रति निर्धारित समय में जारी करेगा।
- पासपोर्ट जारी होने के बाद उसे अदालत में जमा करना होगा।
- विदेश यात्रा के लिए आवेदक को अदालत से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट का भी हवाला
अदालत ने Supreme Court of India के हालिया दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि नागरिकों की आवाजाही और आजीविका की स्वतंत्रता संविधान के तहत संरक्षित है। हालांकि, राज्य आवश्यक परिस्थितियों में इस स्वतंत्रता पर सीमित और उचित प्रतिबंध लगा सकता है।
फैसले का महत्व
यह फैसला उन लोगों के लिए राहत भरा है जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं लेकिन वे पासपोर्ट से जुड़ी सेवाओं के लिए आवेदन करना चाहते हैं। अदालत ने साफ किया कि कानून का पालन करते हुए नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान किया जाना जरूरी है।