भोपाल डेस्क। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि फरीदाबाद में बड़ी संख्या में हिमाचली भाई-बहन रहते हैं और वे शहर के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी हिमाचलियों की सुविधा के लिए फरीदाबाद में हिमाचल भवन के निर्माण की कवायद कई वर्षों से चल रही थी, लेकिन अलग-अलग अड़चनों के कारण यह काम अब तक पूरा नहीं हो पाया था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि फरीदाबाद में हिमाचल भवन का निर्माण हो सके, इसके लिए उनकी 31 लाख रुपये की मांग को स्वीकृति दी गई है। उन्होंने इसके लिए हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल और स्थानीय विधायक धनेश अधलखा का हृदय से आभार जताया।
जहां हिमाचली जाते हैं, वहां बन जाता है मिनी हिमाचल
पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचली समाज की पहचान और योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचली जहां कहीं भी होते हैं, वहां अपने आप एक मिनी हिमाचल बन जाता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश से बाहर रहने वाले हर हिमाचली ने हिमाचल की टोपी का मान-सम्मान बनाए रखा है।उन्होंने कहा कि हिमाचलियों ने अपनी मेहनत और ईमानदारी के जरिए देश के निर्माण की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सेना में हिमाचल के वीरों का गौरवमयी योगदान
पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचल के सैन्य योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि देश के 21 परमवीर चक्र से सम्मानित लोगों में चार हिमाचल प्रदेश से हैं। इसके अलावा हिमाचल के वीरों को 2 अशोक चक्र, 10 महावीर चक्र, 19 कीर्ति चक्र, 51 वीर चक्र, 90 शौर्य चक्र और 989 अन्य सेना मेडल मिले हैं।उन्होंने कहा कि युद्धभूमि और अन्य शौर्य मोर्चों पर हिमाचल के वीरों ने लगभग 1165 सम्मान हासिल किए हैं।
देवभूमि की पहचान पर भी बोले अनुराग ठाकुर
अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचल की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचली देवभूमि के वासी हैं, जिसे साक्षात भोलेनाथ, माता पार्वती, सती और शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त है।उन्होंने कहा कि हिमाचल की पहचान केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां देव भी हैं, वेद भी हैं, शस्त्र भी हैं और शास्त्र भी हैं।
हिमाचली संस्कार और पहचान की अलग पहचान
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि हिमाचली संस्कार, हिमाचली शेर और हिमाचली सेब दूर से ही पहचान में आ जाते हैं। उनके मुताबिक हिमाचल से बाहर रहने वाले लोग भी अपनी संस्कृति, मेहनत और पहचान को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।