वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित बंगालीटोला में कोचबिहार देवोत्तर ट्रस्ट की जमीन पर मौजूद ऐतिहासिक काली मंदिर और अन्य मंदिरों के संरक्षण एवं पुनरुद्धार की दिशा में पहल तेज होती दिखाई दे रही है। इसके साथ ही यहां एक सांस्कृतिक केंद्र और पश्चिम बंगाल भवन विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इसका उद्देश्य वाराणसी आने वाले पश्चिम बंगाल के तीर्थयात्रियों को ठहरने सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
सूनिल बंसल और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने लिया जायजा
प्रस्तावित योजना की वास्तविक स्थिति और संभावित विकास कार्यों की संभावनाओं का आकलन करने के लिए भाजपा के केंद्रीय कमेटी के महासचिव सूनिल बंसल और प्रतिनिधिमंडल ने वाराणसी में स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के पर्यटन विभाग के अधिकारी और वाराणसी जिला प्रशासन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
मंदिर परिसर और प्रस्तावित निर्माण स्थल का किया निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान कोचबिहार देवोत्तर ट्रस्ट की जमीन, मंदिर परिसर और उन संभावित स्थानों को देखा गया जहां भविष्य में सांस्कृतिक केंद्र तथा पश्चिम बंगाल भवन का निर्माण किया जा सकता है। अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने जमीन की मौजूदा स्थिति, उपलब्ध बुनियादी ढांचे, मंदिरों के संरक्षण और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं विकसित करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
धार्मिक स्थल के साथ बंगाल की सांस्कृतिक विरासत का भी केंद्र
कोचबिहार देवोत्तर ट्रस्ट की यह संपत्ति केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है। इससे बंगाल के इतिहास, संस्कृति और वाराणसी के साथ उसके लंबे आध्यात्मिक संबंध की विरासत भी जुड़ी हुई है। ऐसे में मंदिरों के संरक्षण के साथ खाली या अनुपयोगी जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर सांस्कृतिक केंद्र विकसित करने की योजना को बंगाल की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है।
तीर्थयात्रियों के ठहरने और अन्य सुविधाओं पर जोर
प्रस्तावित पश्चिम बंगाल भवन के जरिए वाराणसी पहुंचने वाले बंगाल के श्रद्धालुओं के लिए ठहरने और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करने की योजना है। इससे तीर्थयात्रियों को काशी प्रवास के दौरान बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही सांस्कृतिक केंद्र के माध्यम से बंगाल की कला, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित करने का अवसर मिल सकता है।
मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जा चुका है प्रस्ताव
इस पूरी योजना से संबंधित प्रस्ताव पहले ही पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के समक्ष मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जा चुका है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने और योजना के अमल में आने के बाद मंदिरों के संरक्षण के साथ क्षेत्र में नए विकास कार्य किए जाने की संभावना है।
काशी और बंगाल के सांस्कृतिक रिश्ते को मजबूत करने की कोशिश
इस पहल का व्यापक उद्देश्य बंगाल की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करना और वाराणसी आने वाले पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाना है। इसके साथ ही काशी और बंगाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंध को और मजबूत करने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।