New Delhi | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी और विद्वान श्यामजी कृष्ण वर्मा की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए श्यामजी कृष्ण वर्मा ने जिस साहस और समर्पण का परिचय दिया, उसे देश कभी नहीं भुला सकता। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उन्हें याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारत की पराधीनता की बेड़ियों को तोड़ने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने श्यामजी कृष्ण वर्मा के साहस, पराक्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण को स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण विरासत बताया।
शिवराज सिंह चौहान समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी श्यामजी कृष्ण वर्मा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने विदेश की धरती पर रहकर भारत की स्वतंत्रता की अलख जगाई और युवाओं में राष्ट्रभाव का संचार किया। उन्होंने लोगों से देशहित को सर्वोपरि रखने और अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाने का संकल्प लेने की अपील की। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने श्यामजी कृष्ण वर्मा को महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए उनके इंडिया हाउस और इंडियन होम रूल सोसाइटी के माध्यम से किए गए कार्यों को याद किया। वहीं, केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने भी उनकी जयंती पर उन्हें नमन किया।
4 अक्टूबर 1857 को गुजरात में हुआ था जन्म
श्यामजी कृष्ण वर्मा का जन्म 4 अक्टूबर 1857 को गुजरात के कच्छ जिले के मांडवी में हुआ था। वे संस्कृत के विद्वान, वकील और पत्रकार भी थे। सरकारी प्रकाशनों के अनुसार, उन्होंने विदेश में रहते हुए भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित कीं। उनका नाम भारत के उन स्वतंत्रता सेनानियों में प्रमुखता से लिया जाता है, जिन्होंने ब्रिटेन में रहते हुए भी औपनिवेशिक शासन के खिलाफ राजनीतिक और वैचारिक अभियान को आगे बढ़ाया।
लंदन में बनाया 'इंडिया हाउस', युवाओं को जोड़ा
श्यामजी कृष्ण वर्मा ने लंदन में इंडिया हाउस की स्थापना की, जो आगे चलकर भारतीय राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बना। उन्होंने इंडियन होम रूल सोसाइटी की स्थापना भी की और The Indian Sociologist नामक पत्रिका के जरिए भारत की स्वतंत्रता के पक्ष में विचारों का प्रचार किया। इंडिया हाउस से जुड़े प्रयासों के जरिए उन्होंने ब्रिटेन में रह रहे भारतीय युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रवादी विचारों से जोड़ने का काम किया। सरकारी ऐतिहासिक सामग्री के अनुसार, वीर सावरकर, मदनलाल ढींगरा और लाला हरदयाल जैसे क्रांतिकारी भी उनके विचारों से प्रभावित हुए थे।
2003 में भारत लाई गईं उनकी अस्थियां
श्यामजी कृष्ण वर्मा का निधन 30 मार्च 1930 को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में हुआ था। उनकी इच्छा थी कि स्वतंत्र भारत में उनकी अस्थियां वापस लाई जाएं। वर्ष 2003 में नरेंद्र मोदी, जो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उनकी अस्थियां भारत वापस लेकर आए थे। गुजरात के कच्छ के मांडवी में उनके जीवन और योगदान को समर्पित क्रांति तीर्थ स्मारक भी स्थापित किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में श्यामजी कृष्ण वर्मा की जयंती पर इस स्मारक का उल्लेख करते हुए लोगों से उनके जीवन और योगदान से प्रेरणा लेने की अपील की थी। श्यामजी कृष्ण वर्मा की जयंती पर उन्हें दी गई श्रद्धांजलियां उनके स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान और राष्ट्रवादी विचारों की ऐतिहासिक भूमिका को याद करने का अवसर भी हैं।