लखनऊ - उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर सियासी हलचल तेज है। दोनों दलों के नेताओं की ओर से सीट बंटवारे को लेकर अलग-अलग दावे और बयान सामने आ रहे हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर ऐसा संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने सीटों की संख्या से ज्यादा चुनावी जीत को महत्व देने की बात कही है।
अखिलेश यादव ने दिया जीत पर जोर
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “मकसद जब साफ हो तो हाथ-में-हाथ होता है, निगाह मंजिल पर हो तो सफर आसान होता है!” इसके बाद उन्होंने सीट बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कहा कि गठबंधन में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलती हैं या कौन सी सीट किस दल के हिस्से में जाती है, इससे ज्यादा अहम यह है कि गठबंधन की जीत सुनिश्चित की जाए।
सपा प्रमुख ने अपनी बात को दोहराते हुए लिखा, “बात सीट की नहीं जीत की है।” उनके इस संदेश को मौजूदा सीट शेयरिंग विवाद के बीच सहयोगी दलों के लिए अहम राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सीटों के अंतिम बंटवारे को लेकर अभी कोई औपचारिक समझौता सामने नहीं आया है।
कांग्रेस और सपा के बीच क्या है विवाद?
यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच संभावित सीट बंटवारे पर पिछले कुछ समय से बातचीत और सार्वजनिक बयानबाजी दोनों चल रही हैं। कांग्रेस की ओर से 150 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की बात सामने आई है। वहीं सपा के कुछ नेताओं ने कांग्रेस की इस मांग पर आपत्ति जताई है।
सपा सांसद एसपी सिंह पटेल ने कांग्रेस के सीट दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी को 50 से ज्यादा सीटों की मांग नहीं करनी चाहिए। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल भी उठाए। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों दल गठबंधन के भविष्य और सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत के दौर में हैं।
कांग्रेस की ओर से भी लगातार बयान
दूसरी ओर कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि पार्टी 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस नेताओं की ओर से सीट शेयरिंग को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद सपा के साथ बातचीत का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने भी सीट बंटवारे में देरी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि समय रहते फैसला जरूरी है, ताकि संगठन और कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
अखिलेश का संदेश किस ओर इशारा करता है?
अखिलेश यादव का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब सीट शेयरिंग को लेकर दोनों सहयोगी दलों के नेताओं की सार्वजनिक बयानबाजी चर्चा में है। उनका जोर फिलहाल इस बात पर है कि सीटों की संख्या पर मतभेद गठबंधन के बड़े लक्ष्य पर हावी न हों। हालांकि, उनके बयान से सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय होने की पुष्टि नहीं होती। दोनों दलों के बीच किन सीटों पर कौन चुनाव लड़ेगा और सीटों का अनुपात क्या होगा, इस पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
गठबंधन की राह में सीट शेयरिंग बड़ी चुनौती
यूपी की 403 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच तालमेल गठबंधन की रणनीति का अहम हिस्सा है। फिलहाल सार्वजनिक बयानों से साफ है कि दोनों दल अपने-अपने संगठन और चुनावी दावों को लेकर सक्रिय हैं।
ऐसे में अखिलेश यादव का “बात सीट की नहीं, जीत की है” वाला संदेश सीट शेयरिंग की खींचतान के बीच गठबंधन को एकजुट रखने की कोशिश के तौर पर सामने आया है। अब निगाह इस बात पर है कि दोनों दल बातचीत के जरिए सीटों का अंतिम फॉर्मूला कब तय करते हैं।