नई दिल्ली - लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं और पेपर लीक के मुद्दे पर चल रही चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के एक बयान ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा सुधारों के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स पर निशाना साधते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि इसमें एक "गौमूत्र विशेषज्ञ" भी शामिल है। हालांकि उन्होंने किसी सदस्य का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को लेकर संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस तेज हो गई।
किसकी ओर था इशारा?
प्रियंका गांधी के बयान को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटि की ओर इशारा माना जा रहा है। प्रो. कामाकोटि इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के सदस्य हैं। प्रो. कामाकोटि वर्ष 2025 में गोमूत्र के संभावित एंटीबैक्टीरियल और पाचन संबंधी गुणों को लेकर दिए गए अपने बयान के कारण चर्चा में आए थे। उस समय उनके बयान की वैज्ञानिक और राजनीतिक स्तर पर काफी आलोचना हुई थी। अब प्रियंका गांधी ने उसी संदर्भ को उठाते हुए सरकार पर तंज कसा।
अनुराग ठाकुर ने किया पलटवार
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने प्रियंका गांधी के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का उपहास उड़ाने का काम करती रही है। उनके मुताबिक, किसी वैज्ञानिक को इस तरह संबोधित करना न केवल अनुचित है बल्कि देश के वैज्ञानिक समुदाय का भी अपमान है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रियंका गांधी जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा करने के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणियों और व्यंग्य का सहारा ले रही है।
परीक्षा सुधारों पर जारी है बहस
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के सुझावों के आधार पर सुधार लागू करने की दिशा में काम कर रही है। विपक्ष लगातार टास्क फोर्स की संरचना और सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि समिति में शिक्षा, तकनीक और प्रशासन से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
प्रियंका गांधी के बयान और उस पर भाजपा की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा अब केवल परीक्षा सुधारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया विषय बन गया है। एक ओर कांग्रेस सरकार की समिति की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर भाजपा विपक्ष पर वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का अपमान करने का आरोप लगा रही है। ऐसे में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं।
