टेक्नोलॉजी दिग्गज Apple Inc. ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में अपने उत्पादन को तेजी से बढ़ाया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में कंपनी ने भारत में करीब 5.5 करोड़ iPhone असेंबल किए, जो 2024 में बने लगभग 3.6 करोड़ iPhone की तुलना में करीब 53 प्रतिशत अधिक है। इस तेजी के बाद अब कंपनी के कुल वैश्विक iPhone उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा भारत में तैयार हो रहा है।
वैश्विक उत्पादन में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी
Apple हर साल वैश्विक स्तर पर लगभग 22 से 23 करोड़ iPhone बनाती है। ऐसे में भारत की हिस्सेदारी लगातार बढ़ती जा रही है और कंपनी के लिए यह एक महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनता जा रहा है। उत्पादन में यह वृद्धि दिखाती है कि Apple धीरे-धीरे चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रही है।
चीन से हटकर नए विकल्प तलाश रही कंपनी
हाल के वर्षों में China और United States के बीच व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवाद ने कई वैश्विक कंपनियों को अपने उत्पादन केंद्रों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। इन परिस्थितियों के चलते Apple और उसके सप्लायर अमेरिकी बाजार के लिए बनने वाले iPhone का बड़ा हिस्सा अब वैकल्पिक देशों में शिफ्ट कर रहे हैं, जिसमें भारत एक प्रमुख विकल्प बनकर उभरा है।
सरकारी प्रोत्साहन से मिला बड़ा फायदा
भारत में उत्पादन बढ़ाने के पीछे सरकार की औद्योगिक नीतियों की भी बड़ी भूमिका है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार द्वारा लागू किए गए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) कार्यक्रम ने कंपनियों को देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए आकर्षित किया है। इन सब्सिडी और प्रोत्साहनों ने कंपनियों को भारत में मौजूद लॉजिस्टिक चुनौतियों और सप्लाई चेन की सीमाओं के बावजूद निवेश करने के लिए प्रेरित किया है।
भारत बन रहा वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। Apple जैसी बड़ी कंपनियों का उत्पादन बढ़ना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। इससे न केवल देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में भी अधिक महत्वपूर्ण स्थान मिल सकता है।
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