नई दिल्ली: कॉर्पोरेट कानून के अनुपालन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में Registrar of Companies (ROC) को बड़ी कानूनी सफलता मिली है। दिल्ली की तिस हजारी कोर्ट ने Arise India Limited और उसके तीन कंपनी सचिवों को Companies Act, 2013 के प्रावधानों के उल्लंघन का दोषी करार दिया है। इस मामले में ROC की ओर से कंपनी प्रॉसिक्यूटर नितिन अग्निहोत्री ने अभियोजन का पक्ष रखा। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर कंपनी और उसके अधिकारियों के खिलाफ दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2017 में दर्ज किया गया था। आरोप था कि Arise India Limited ने वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए कानून के तहत अनिवार्य कॉस्ट ऑडिटर की नियुक्ति नहीं की और निर्धारित समय सीमा के भीतर कॉस्ट ऑडिट रिपोर्ट भी दाखिल नहीं की। अदालत ने माना कि यह Companies Act, 2013 की धारा 148(2) और 148(3) का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके लिए कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों पर अभियोजन चलाया गया।
नितिन अग्निहोत्री की पैरवी से मिला अभियोजन को बल
करीब नौ वर्षों तक चले इस मुकदमे में ROC की ओर से कंपनी प्रॉसिक्यूटर नितिन अग्निहोत्री ने लगातार अभियोजन का पक्ष रखा। मुकदमे के दौरान दस्तावेजी साक्ष्य, सरकारी रिकॉर्ड और गवाहों की गवाही के आधार पर अभियोजन ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा। अंततः अदालत ने इन साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए आरोपियों को दोषी करार दिया। यह फैसला ROC के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी उपलब्धि माना जा रहा है।
किन आरोपियों को अदालत ने ठहराया दोषी?
दिल्ली की तिस हजारी कोर्ट ने Arise India Limited, कंपनी सचिव बिरेश कुमार दास, सचिन वर्मा तथा फरार घोषित कंपनी सचिव सुमित कुमार श्रीवास्तव को दोषी ठहराया। अदालत ने सुमित कुमार श्रीवास्तव को अनुपस्थिति (In Absentia) में दोषी घोषित करते हुए कहा कि उनकी गिरफ्तारी के बाद सजा को लागू किया जाएगा।
क्यों दोषी ठहराई गई कंपनी?
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि कंपनी का कारोबार Companies (Cost Records and Audit) Rules, 2014 के तहत निर्धारित सीमा से काफी अधिक था। ऐसे में कंपनी के लिए कॉस्ट ऑडिटर नियुक्त करना और कॉस्ट ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य था। इसके बावजूद कंपनी ने इन वैधानिक दायित्वों का पालन नहीं किया, जिसे अदालत ने गंभीर कॉर्पोरेट लापरवाही माना।
मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ पहले हो चुकी थी कार्रवाई
मामले में कंपनी के तत्कालीन प्रबंध निदेशक अविनाश कुमार जैन के खिलाफ कार्यवाही पहले ही कम्पाउंड की जा चुकी थी। इसके बाद मुकदमा कंपनी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ जारी रहा और अंततः अदालत ने दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।
अब सजा पर होगी सुनवाई
दोषसिद्धि के बाद अदालत ने सभी दोषियों को 6 जुलाई 2026 को सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए तलब किया है। इसी दिन अदालत सजा और जुर्माने को लेकर अंतिम आदेश पारित करेगी।