अरुणाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र सोमवार सुबह उस समय अचानक दहल उठे, जब कुछ ही समय के अंतराल में भूकंप के दो झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार पहला भूकंप सुबह लगभग 5 बजकर 45 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.1 दर्ज की गई। इसका केंद्र अपर सियांग जिले में भूमि से लगभग 11 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। इस झटके के बाद लोगों में दहशत फैल गई और कई स्थानों पर लोग एहतियातन अपने घरों और भवनों से बाहर निकल आए। इसके लगभग डेढ़ घंटे बाद सुबह 7 बजकर 17 मिनट पर 3.5 तीव्रता का दूसरा झटका भी महसूस किया गया, जिसका केंद्र भी अपर सियांग ही रहा और इसकी गहराई लगभग 5 किलोमीटर दर्ज की गई।
फिलहाल किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं, प्रशासन की सतत निगरानी
दोनों भूकंपों के बाद राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखी। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार अब तक किसी व्यक्ति के हताहत होने, भवनों के क्षतिग्रस्त होने अथवा अन्य किसी बड़े नुकसान की सूचना प्राप्त नहीं हुई है। स्थानीय प्रशासन ने दूरदराज के गांवों और पहाड़ी इलाकों से भी जानकारी एकत्रित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है ताकि यदि कहीं कोई क्षति हुई हो तो तत्काल राहत एवं सहायता उपलब्ध कराई जा सके। अधिकारियों ने नागरिकों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की है।
भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है पूर्वोत्तर भारत
भूवैज्ञानिकों के अनुसार अरुणाचल प्रदेश सहित समूचा पूर्वोत्तर भारत देश के सबसे अधिक भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। यह क्षेत्र भारतीय और यूरेशियाई विवर्तनिक प्लेटों की सक्रिय गतिविधियों के प्रभाव में आता है, जिसके कारण यहां समय-समय पर हल्के से लेकर मध्यम तथा कभी-कभी तीव्र भूकंप भी आते रहते हैं। पर्वतीय भू-आकृति और सक्रिय भ्रंश रेखाओं की उपस्थिति इस क्षेत्र को विशेष रूप से संवेदनशील बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और मध्यम तीव्रता के भूकंप भूगर्भीय गतिविधियों के संकेत अवश्य देते हैं, लेकिन इनके आधार पर किसी बड़े भूकंप की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।
एक वर्ष पहले भी अपर सियांग में महसूस हुई थी धरती की हलचल
अपर सियांग जिले में इससे पहले भी भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जा चुकी हैं। सितंबर 2025 में इसी जिले में रिक्टर पैमाने पर 3.2 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र भूमि से लगभग 10 किलोमीटर नीचे स्थित था। उस समय भी किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली थी। लगातार अंतराल पर दर्ज हो रही ऐसी घटनाएं इस क्षेत्र की भूकंपीय सक्रियता को रेखांकित करती हैं और यह संकेत देती हैं कि यहां आपदा प्रबंधन संबंधी तैयारियों को निरंतर सुदृढ़ बनाए रखना आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने सतर्कता और तैयारी को बताया सबसे प्रभावी उपाय
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उचित तैयारी और जागरूकता के माध्यम से इनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। भूकंप के दौरान घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर पहुंचना, भवन निर्माण में भूकंपरोधी मानकों का पालन करना तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। पूर्वोत्तर के राज्यों में नियमित मॉक ड्रिल, सार्वजनिक जागरूकता अभियान और आधुनिक निगरानी तंत्र भविष्य में संभावित आपदाओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।